पंजाब में जहां एक तरफ श्री अकाल तख्त साहिब ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनकी कथित आपत्तिजनक वीडियो के लिए दोषी पाया है और उन्हें 'गुरु का दोषी और पंथ विरोधी' करार देकर सिख समुदाय से उनके सामाजिक बहिष्कार का आदेश दिया है. 

Continues below advertisement

वहीं दूसरी तरफ भगवंत मान ने सिख धार्मिक संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल का पुराना मुद्दा उठा दिया है. शिरोमणि अकाली दल पर पहले से ही ये आरोप लगते रहे हैं कि सिख धार्मिक संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक मकसद के लिए पार्टी करती रही है. 

दरअसल, अकाल तख्त जत्थेदार की नियुक्ति और उन्हें पद से हटाने का काम शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी करती है. SGPC में शिरोमणि अकाली दल का बहुमत है. इसीलिए ये आरोप अकाली दल पर लगते हैं कि जो जत्थेदार पार्टी के आदेश को नहीं मानते उन्हें हटा दिया जाता है. हाल ही में ज्ञानी हरप्रीत सिंह और ज्ञानी रघबीर सिंह को जत्थेदार के पद से SGPC ने हटाया है.

Continues below advertisement

 

ये भी पढ़ें: अकाल तख्त ने सीएम भगवंत मान को घोषित किया 'पंथ विरोधी', अब अरविंद केजरीवाल बोले- 'झूठ बोलकर...'

सीएम मान ने लगाया बदनाम करने का आरोप

भगवंत मान ने इसी राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया है कि उन्हें राजनीतिक आकाओं के आदेश पर दोषी ठहराया गया है और इन्हीं राजनीतिक आकाओं के आदेश पर उन्हें धार्मिक तौर पर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.

धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण, अक्टूबर 2015 की गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर फरीदकोट के बेहबल कलां में पुलिस फायरिंग, जिसमे दो लोगों की मौत हो गई थी, का मुद्दा भी तूल पकड़ रहा है.

सुखबीर सिंह बादल ने कबूली थीं गलतियां

वहीं दिसंबर 2025 में अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उस वक्त के अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर के सामने उस वक्त अकाली दल बीजेपी गठबंधन सरकार के वक्त हुई धार्मिक गलतियों को कबूल किया था. 

अब जबकि ज्ञानी रघबीर सिंह को जत्थेदार के पद से हटा दिया गया है, बेहबल कलां पुलिस फायरिंग की जांच कर रही स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने इस संबंध में ज्ञानी रघबीर सिंह के बयान दर्ज किए हैं. ये माना जा रहा है कि ज्ञानी रघबीर सिंह के बयानों के आधार पर पुलिस सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ शिकंजा कस सकती है. 

सीएम मान पर हमलावर हुआ विपक्ष

भगवंत मान को अकाल तख्त द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद पूरा विपक्ष हमलावर हो गया है और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है. ये माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में धार्मिक मुद्दों पर राजनीति और तेज होगी क्योंकि हर राजनीतिक दल धर्म का कार्ड खेलकर अलग अलग वोट बैंक को साधने की कोशिश में लगा है. 

चुनाव से पहले छाए रहे धार्मिक मुद्दे

गौरतलब है कि पिछले दो विधानसभा चुनावों में धार्मिक मुद्दों पर चुनाव से पहले जबरदस्त राजनीति हुई है. 2017 के विधानसभा चुनाव के वक्त 2015 में हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी और इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पुलिस कार्रवाई का मुद्दा छाया रहा था.

पिछले विधानसभा चुनाव में भी हावी रहा 2015 का मुद्दा

इसके अलावा 2022 के विधानसभा चुनाव में भी 2015 का मुद्दा हावी रहा था, क्योंकि उस वक्त कांग्रेस पर आरोप लगे थे कि बेअदबी और पुलिस कार्रवाई की घटनाओं में कार्रवाई करने में सरकार विफल रही है. इन्हीं मुद्दों पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था. अब आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भी धार्मिक मुद्दे एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गए हैं.

ये भी पढ़ें: पंजाब के सीएम पद से इस्तीफा देंगे भगवंत मान? अरविंद केजरीवाल डालेंगे दबाव! उठे सवाल