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शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में किसानों की भयावह स्थिति को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है. ठाकरे ने कहा कि किसान कर्ज के बोझ और प्रकृति के रौद्र रूप (लगातार बारिश) के दोहरे संकट में फंसा है. उन्होंने सरकार के रवैये को 'संवेदनहीन' और 'तुगलकी कारभार' करार देते हुए, किसानों को "बहकाए बिना तुरंत कर्जमुक्त करने" की जोरदार मांग की है.

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ठाकरे ने सरकार द्वारा कर्जमाफी के लिए अगले साल जून तक का समय दिए जाने को किसानों के साथ 'क्रूर मजाक' बताया. उन्होंने कहा कि जब किसानों की दुर्दशा सबके सामने है, तो विदेश दौरे पर भेजी गई समिति आखिर क्या अध्ययन करेगी? उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर कर्जमाफी जून में होनी है, तो क्या किसानों को अभी अपनी किश्तें भरनी चाहिए?

'कौन देगा इन सवालों का जवाब'

उन्होंने कई व्यावहारिक सवाल उठाए, "अगर किसान अभी किश्तें नहीं भरते, तो क्या उन्हें रबी सीजन के लिए नया कर्ज मिलेगा? और अगर नया कर्ज मिला, तो क्या वह भी माफ किया जाएगा? इन सवालों का जवाब कौन देगा?"

'लगातार आ रही हैं किसानों की आत्महत्याओं की खबरें'

ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के घावों पर नमक छिड़क रही है. उन्होंने कहा, "मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र से लगातार किसानों की आत्महत्याओं की खबरें आ रही हैं. क्या ये आंकड़े सरकार के कानों तक नहीं पहुंचते?" उन्होंने कहा कि कर्जमाफी में देरी कर यह सरकार किसानों को मौत के दरवाजे तक धकेल रही है और पूछा कि क्या सरकार जून तक आत्महत्या करने वाले किसानों की जिम्मेदारी लेगी.

'नहीं पहुची किसानों के खातों तक नुकसान भरपाई'

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में पिछले छह महीनों से बारिश किसानों का पीछा नहीं छोड़ रही, जिससे किसान पूरी तरह बर्बाद हो गया है. उनके अनुसार, हजारों करोड़ की नुकसान भरपाई की घोषणा तो हुई, लेकिन वह किसानों के खातों तक नहीं पहुंची.

'बंद होना चाहिए किसानों को धोखा देने का खेल'

उद्धव ठाकरे ने कहा कि कर्जमाफी देने का इससे "उचित समय" और कोई नहीं हो सकता. उन्होंने सरकार पर टालमटोल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह "किसानों को धोखा देने का खेल" बंद होना चाहिए. उन्होंने "मायबाप सरकार" से हाथ जोड़कर विनती की कि इस अभूतपूर्व संकट में फंसे किसानों को तुरंत कर्जमुक्त किया जाए.