महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं. सोमवार (22 जून) को ही पार्टी के 6 सांसदों ने औपचारिक रूप से साथ छोड़ दिया. इसके बाद शिवसेना (यूबीटी) की विधायक दल की अहम बैठक में 3 विधायक और 1 एमएलसी के शामिल नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गईं.

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उद्धव ठाकरे ने सोमवार को मुंबई के शिवालय में पार्टी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई थी. बैठक में आगामी राजनीतिक हालात, संगठन को मजबूत करने और विधानसभा में विपक्ष की रणनीति जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. एक तरफ महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की चर्चा तेज है, तो दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे भी संगठन को संभालने के लिए पूरी तरह सक्रिय नजर आए.

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कौन-कौन नहीं पहुंचा बैठक में?

बैठक में विधायक संजय देरकर (यवतमाल), राहुल पाटिल (परभणी), संजय पोतनीस (कलीना, मुंबई) और एमएलसी सुनील शिंदे मौजूद नहीं रहे. हालांकि पार्टी सूत्रों के मुताबिक इन सभी नेताओं ने पहले ही अपनी गैरहाजिरी की जानकारी दे दी थी.

राहुल पाटिल एमएलसी चुनाव में व्यस्त थे, जबकि सुनील शिंदे अपने गांव में आयोजित पूजा कार्यक्रम में शामिल होने गए थे. अन्य नेताओं ने भी निजी कारण और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का हवाला दिया.

ताकत दिखाने की कोशिश

शिवसेना (यूबीटी) के पास फिलहाल विधानसभा में 20 विधायक और 6 एमएलसी हैं. करीब एक घंटे चली बैठक के बाद मौजूद सभी विधायकों ने उद्धव ठाकरे के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाकर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की.

विपक्ष की भूमिका पर जोर

पार्टी के एमएलसी अंबादास दानवे ने कहा कि बैठक में किसानों, आम जनता, मुंबई, विदर्भ और मराठवाड़ा में पानी की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

उन्होंने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) विधानसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है और उसे आक्रामक तरीके से जनता के मुद्दे उठाने होंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी अब भी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर अपना दावा बनाए हुए है.

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