महाराष्ट्र विधान परिषद के 9 सदस्य मई महीने में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं. इस मौके पर आयोजित विदाई समारोह में उद्धव ठाकरे ने भावुक अंदाज में अपना मनोगत व्यक्त किया. उनके साथ नीलम गोह्रे, अमोल मिटकरी, शशिकांत शिंदे, रणजीतसिंह मोहिते पाटील और संजय केनेकर समेत अन्य सदस्य भी इस सूची में शामिल हैं.
मूल रूप से कलाकार हूं, नेता नहीं
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि उनका स्वभाव राजनीति का नहीं, बल्कि एक कलाकार का है. उन्होंने हल्के अंदाज़ में सवाल भी उठाया कि जब लोग उन्हें इतने अच्छे से जानते हैं, तो फिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि उन्हें किसी का हाथ पकड़ना पड़ा. उनके इस बयान को राजनीतिक हालातों से जोड़कर भी देखा जा रहा है.
ठाकरे ने कहा कि वे इस सदन में मुख्यमंत्री के रूप में आए थे और उस दौरान कई जिम्मेदारियां अचानक उनके सामने आईं. उन्होंने माना कि उन जिम्मेदारियों से भागना सही नहीं था.
अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने मंत्रिमंडल के साथियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का विशेष रूप से धन्यवाद किया.
फडणवीस के भाषण का किया जिक्र
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का धन्यवाद करते हुए ठाकरे ने एक पुराना प्रसंग याद किया. उन्होंने संत ज्ञानेश्वर का उदाहरण देते हुए कहा कि आज के समय में स्वार्थ के लिए मूल्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है. यह टिप्पणी वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर एक तरह की प्रतिक्रिया मानी जा रही है.
'बुवा शक्ति नहीं, युवा शक्ति जरूरी'
उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में युवाओं की ताकत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि सभी नेताओं को मिलकर ढोंगी बाबाओं की बजाय युवा शक्ति को मजबूत करना चाहिए. उनके मुताबिक असली चमत्कार कोई बाबा नहीं, बल्कि देश के युवा कर सकते हैं.
मुख्यमंत्री कार्यकाल की यादें साझा कीं
ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के बाद मंत्रालय में प्रवेश के दिन को यादगार बताया. उन्होंने कहा कि जब वे ‘वर्षा’ बंगला छोड़ रहे थे, उस समय महाराष्ट्र के लोगों का जो प्यार मिला, वह बेहद भावुक करने वाला था.
उन्होंने कहा कि ऐसा स्नेह हर किसी के हिस्से में नहीं आता. उन्होंने यह भी बताया कि पद छोड़ने के बाद भी वे ‘मातोश्री’ से ही काम करते रहे और वहीं पर मंत्रियों से मुलाकात होती थी.
उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए कई अहम फैसलों को भी गिनाया. इसमें रायगढ़ को फंड देने का निर्णय, औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर करना, कोविड के दौरान मुंबई मॉडल, टास्क फोर्स का गठन, किसान कर्ज माफी, शिवभोजन थाली योजना और समृद्धि महामार्ग व मेट्रो परियोजनाओं को जारी रखना शामिल है. उन्होंने मराठी भाषा को अनिवार्य करने के फैसले का भी जिक्र किया.
अजित पवार को याद किया
अपने संबोधन में उन्होंने अजित पवार का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अजित पवार ने हमेशा मजबूती से साथ दिया और अच्छे कामों में कभी रुकावट नहीं डाली.
उद्धव ठाकरे ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें भी रखीं. उन्होंने मराठी भाषा भवन के निर्माण, चौपाटी पर मराठी रंगभूमि गैलरी और वर्ली डेयरी में विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने की मांग की.
उन्होंने कहा कि भले ही रास्ते अलग हो जाएं, लेकिन लोकतंत्र में मुलाकातें होती रहनी चाहिए, सदन में भी और चुनावों में भी. साथ ही उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के नेता की नियुक्ति की भी मांग उठाई.
