महाराष्ट्र में त्रिभाषा सूत्र के अमल को लेकर गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. सरकार आने वाले दिनों में इस पर अंतिम फैसला लेगी. हिंदी भाषा किस कक्षा से अनिवार्य की जाए, इस विषय पर गठित नरेंद्र यादव समिति ने सोमवार (9 फरवरी) को अपनी रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार को सौंपी. 

Continues below advertisement

गौरतलब है कि पिछले साल राज्य सरकार ने पहली कक्षा से हिंदी भाषा को अनिवार्य करने का फैसला लिया था. हालांकि जनता के विरोध के बाद सरकार ने यह निर्णय वापस लेते हुए हिंदी भाषा के इम्प्लीमेंटेशन को लेकर एक विशेष समिति का गठन किया था.

समिति को दी गई थी यह जिम्मेदारी

इस समिति को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को किस कक्षा से लागू किया जाए. समिति ने महाराष्ट्र भर में शिक्षा विशेषज्ञों और जानकारों से मुलाकात की, साथ ही संवाद कार्यक्रम आयोजित कर सुझाव लिए. इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है.

Continues below advertisement

अब महाराष्ट्र सरकार इस रिपोर्ट को कैबिनेट बैठक में रखकर उस पर चर्चा करेगी और इसके लागू किए जाने या न किए जाने को लेकर निर्णय लेगी. उम्मीद लगाई जा रही है कि सरकार इस पर जल्द ही फैसला लेने वाली है.

रिपोर्ट सौंपने के बाद राज्य में बढ़ी हलचल

महाराष्ट्र में त्रिभाषा सूत्र पर समिति की रिपोर्ट सौंपने के बाद हलचल बढ़ गई है. महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को लागू करने पर नई बहस छिड़ी हुई. बता दें कि हिंदी भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. इसको लेकर मनसे प्रमुख राज ठाकरे लगातार राज्य में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य किए जाने का विरोध कर रहे थे.

 राज ठाकरे तीसरी भाषा के संबंध में सरकार के निर्णय से खुश नहीं थे. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी वैकल्पिक भाषा के रूप में पढ़ाने का फैसला किया था. हालांकि राज्य में इसका बड़े स्तर पर विरोध हुआ था.