महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट में जारी राजनीतिक हलचल के बीच पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार (22 जून) दोपहर नारिमन पॉइंट स्थित पार्टी कार्यालय ‘शिवालय’ में अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों (MLC) की अहम बैठक बुलाई. हाल ही में पार्टी के 6 सांसदों के बागी होने के बाद हुई इस बैठक को संगठन को एकजुट रखने और आगे की रणनीति तय करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
'ऑपरेशन टाइगर' के बाद शक्ति प्रदर्शन
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ‘ऑपरेशन टाइगर’ के बाद यह पहली बड़ी बैठक थी, जिसमें उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों और MLC से सीधे संवाद किया. बैठक के दौरान संगठन की मौजूदा स्थिति, विधानसभा के मानसून सत्र में पार्टी की भूमिका और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की गई.
फिलहाल शिवसेना (UBT) के पास 20 विधायक और 6 MLC हैं. वहीं 6 सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद अब लोकसभा में केवल 3 सांसद और राज्यसभा में 1 सांसद ही बचे हैं.
संजय राउत का एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला
बैठक के बाद राज्यसभा सांसद संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा, “एकनाथ शिंदे की डिलीवरी हुई है. उन्होंने गद्दार सांसदों को जन्म दिया है. केन्या की एक महिला ने एक साथ पांच बच्चों को जन्म दिया था, लेकिन एकनाथ शिंदे ने उसका भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है. वे कहते हैं कि उनकी बॉडी बिल्कुल ठीक है, लेकिन उन्हें बाद में पता चलेगा, क्योंकि उनका सीज़ेरियन करना पड़ेगा.”
बैठक में ये नेता रहे मौजूद
बैठक में पक्ष प्रमुख उद्धव ठाकरे, राज्यसभा सांसद संजय राउत के अलावा विधायक अनंत बाला नर, हारून खान, प्रवीण स्वामी, नितिन देशमुख, सुनील राउत, अजय चौधरी, गजानन लवटे, आदित्य ठाकरे, सुनील प्रभु, वरुण सरदेसाई, कैलाश पाटील और भास्कर जाधव मौजूद रहे.
वहीं विधान परिषद सदस्यों में सचिन अहीर, जे.एम. अभ्यंकर, अनिल परब, मिलिंद नार्वेकर और अंबादास दानवे बैठक में शामिल हुए.
पार्टी सूत्रों के अनुसार कुछ विधायक और MLC विधानसभा व विधान परिषद की कार्यवाही में व्यस्त होने के कारण बैठक में समय पर नहीं पहुंच सके. उनके थोड़ी देर में बैठक स्थल पर पहुंचने की सूचना दी गई थी.
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सांसदों की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों और नेताओं को एकजुट बनाए रखने की है.
ऐसे में ‘शिवालय’ में हुई यह बैठक केवल रणनीति तय करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
