कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार (28 मई) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सिद्धारमैया के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे उनके प्रति सम्मान और बढ़ गया है.

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‘सिद्धारमैया के प्रति मेरा आदर बढ़ गया’

संजय राउत ने कांग्रेस के भीतर हुए इस सत्ता परिवर्तन को पार्टी का आंतरिक मामला बताते हुए कहा, "यह कांग्रेस पार्टी की एक आंतरिक व्यवस्था है. लेकिन मेरा जो आदर सिद्धरामैया के प्रति है, वह बढ़ गया है. इतनी सहज और शांतिपूर्ण तरीके से किसी राज्य में सत्ता परिवर्तन बहुत कम देखने को मिलता है. कोई आसानी से अपना पद नहीं छोड़ता."

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उन्होंने कहा, "सिद्धरामैया एक अनुभवी नेता हैं और वहां के लोकप्रिय जननेता हैं. लेकिन कांग्रेस पार्टी के आदेश पर उन्होंने पद छोड़ दिया. यह देश की राजनीति में बहुत कम बार देखने को मिलता है. इसलिए सिद्धरामैया के प्रति मेरा सम्मान और आदर और भी बढ़ गया है."

राउत के इस बयान को राजनीतिक हलकों में अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने सत्ता छोड़ने के फैसले को लोकतांत्रिक परंपराओं और पार्टी अनुशासन का उदाहरण बताया है.

आलाकमान के निर्देश पर दिया इस्तीफा

मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया ने भी साफ किया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देश का पालन किया है. उन्होंने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. आलाकमान ने मुझे दो दिन पहले पद छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसके अनुसार मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया."

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सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कर्नाटक की राजनीति में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हालांकि कांग्रेस की ओर से इसे पहले से तय संगठनात्मक प्रक्रिया बताया जा रहा है. वहीं संजय राउत का बयान इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित राजनीतिक प्रतिक्रिया बनकर सामने आया है.

राउत ने स्पष्ट किया कि किसी बड़े नेता का पार्टी के फैसले को स्वीकार करते हुए बिना विवाद पद छोड़ना आज की राजनीति में दुर्लभ है और इसी वजह से सिद्धारमैया के प्रति उनका सम्मान पहले से अधिक बढ़ गया है.