Sanjay Nirupam on Rahul Gandhi: शिवसेना नेता और प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनकी कथित साप्ताहिक दिनचर्या का खुलासा किया है. निरुपम का कहना है कि राहुल गांधी सप्ताह के हर दिन एक अलग एजेंडा लेकर सामने आते हैं, जो जमीनी मुद्दों से बहुत दूर होता है और इसी कारण जनता उनसे दूर होती जा रही है.

निरुपम ने तंज कसते हुए कहा, राहुल गांधी की एक फिक्स साप्ताहिक दिनचर्या है.

- सोमवार को उन्हें याद आता है कि वह विपक्ष के नेता हैं और भावी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार भी. ऐसे में वे सभाओं में ‘नरेंद्र सरेंडर’ जैसे जुमले उछालते हैं.

- मंगलवार को उन्हें लगता है कि पार्टी उनके परिवार की है, इसलिए पार्टी की कमान भी उन्हीं के पास होनी चाहिए. उस दिन वह अपने ही नेताओं को ‘घोड़ा’ कहकर अलग-अलग श्रेणियों में बांटते हैं.

- बुधवार को उन्हें कांग्रेस की विचारधारा याद आती है, और वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधते हैं. बीते 10 सालो से वह RSS को देश के लिए खतरा बता रहे हैं.

- गुरुवार को उन्हें OBC वोट बैंक की याद आती है, और वह जातिगत जनगणना की मांग करने लगते हैं, जैसे कि जातीय जनगणना से देश की सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी.

- शुक्रवार को वह वामपंथियों और हिंदू विरोधियों को खुश करने में जुट जाते हैं. वीर सावरकर जैसे राष्ट्रभक्तों के खिलाफ बयान देते हैं.

- शनिवार को वह उन राज्यों की हार के लिए चुनाव आयोग को दोष देते हैं.

महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि होती रही है

संजय निरुपम, राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जिसमें राहुल गांधी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में धांधली और मिलीभगत का आरोप लगाया था. निरुपम ने जवाब दिया, देश की आजादी के बाद कांग्रेस ने कभी भी चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में विपक्ष से राय नहीं ली. आज कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है.

उन्होंने आगे कहा, महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच हमेशा मतदाताओं की संख्या में वृद्धि होती रही है. चुनाव से पहले सभी पार्टियां मतदाता पंजीकरण के लिए अभियान चलाती हैं. ऐसे में मतदाता बढ़ना कोई असामान्य बात नहीं है.

राहुल गांधी पराजित मानसिकता के शिकार - संजय निरुपम 

संजय निरुपम ने राहुल गांधी ने कामठी सीट का उदाहरण दिया जहां आखिरी घंटे में वोटिंग बढ़ी और बीजेपी जीत गई. लेकिन माढा में 18%, वणी में 13% और श्रीरामपुर में 12% वोटिंग अंतिम घंटे में बढ़ी और वहां महाविकास आघाड़ी (MVA) के उम्मीदवार जीत गए. 

अंत में उन्होंने  कहा, राहुल गांधी को आत्मचिंतन करना चाहिए. वह पराजित मानसिकता के शिकार हैं. मतदाता उनसे लगातार दूरी बना रहे हैं और वह हर बार हार का ठीकरा जनादेश और चुनाव आयोग पर फोड़ते हैं. अगर चुनाव में वाकई धांधली होती तो मैं क्यों विधानसभा चुनाव हार जाता? झारखंड में जब कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीता, तब तो किसी ने चुनाव आयोग पर सवाल नहीं उठाया.