केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार (01 फरवरी) को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया. शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने प्रतिक्रिया देते हुए बजट को जनकल्याणकारी बताया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 2026-27 के बजट से तीन शब्दों की ध्वनि निकल रही है. पहला शब्द विकास, दूसरा जन कल्याण और तीसरा शब्द देश की सुरक्षा है. बजट में देश के नौजवानों, माताओं-बहनों, बुजुर्गों, किसानों, मजदूरों और छोटे-छोटे उद्यमी के लिए बड़े पैमाने पर कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की गई है. 

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संजय निरुपम ने कहा, ''विकास के संदर्भ में मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि इस बजट में 12 लाख करोड़ से ज्यादा पूंजीगत ढांचे पर खर्च करने का प्रस्ताव है. मतलब कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाया जा रहा है. इससे देश में जो विकास की गति चल रही है, वह तेजी से आगे बढ़ेगी. जब सरकार खर्च बढ़ाती है तो उससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है.'' 

किसी की जेब ढीली नहीं होगी- संजय निरुपम

उन्होंने आगे कहा, ''जब लिक्विडिटी बढ़ती है तो एक गरीब, कमजोर और मजदूर के स्तर पर काम करने वाला व्यक्ति हैं, उससे लेकर बड़े-बड़े उद्योगपति हों या फिर बड़े अधिकारी हों, उनकी जेब तक पैसा पहुंचता है. तो पूरे भारत के मार्केट में तेजी से लिक्विडिटी बढ़ेगी जिसका लाभ सबको मिलेगा. यानी किसी की जेब ढीली नहीं होगी. 

'महिलाओं का कल्याण होगा, युवाओं को नए अवसर मिलेंगे'

शिवसेना नेता ने ये भी कहा कि बजट में देश के नौजवानों, माताओं-बहनों, बुजुर्गों, किसानों, मजदूरों और छोटे-छोटे उद्यमी के लिए बड़े पैमाने पर कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की गई है और उन योजनाओं के लिए फंड भी अलॉट किए गए हैं. उन्होंने कहा, ''ये बजट मोटे तौर पर जनकल्याणकारी दिख रहा है. इसमें महिलाओं का भी कल्याण होगा, युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और बुजुर्ग अपने आप को सुरक्षित महसूस करेंगे. कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के लिए कई सारी योजनाएं आई हैं.''