महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दिल्ली पुलिस को अपने हाथों में लेकर प्रदर्शनकारियों को कुचल रही है.

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राज ठाकरे ने कहा, 'कोई भी राष्ट्र अपनी स्वतंत्रता की कीमत पर कृतज्ञ नहीं हो सकता.' ये शब्द भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के हैं. नवंबर 1949 में भारतीय संविधान का मसौदा पेश करते हुए उन्होंने ये अत्यंत महत्वपूर्ण शब्द कहे थे. किसी नेता के प्रति अंधभक्ति या उसकी चापलूसी को बढ़ावा देने के लिए इस देश की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी को कभी भी जरा-सा भी दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए.

'तानाशाही चरम पर'

मनसे प्रमुख आज इन शब्दों को दोहराना जरूरी है, क्योंकि तानाशाही चरम पर है. इसी तानाशाही के बल पर इस जोड़ी ने देश की पूरी मशीनरी पर कब्जा जमा लिया है और हासिल की गई शक्ति का इस्तेमाल केवल मुट्ठी भर उद्योगपतियों के फायदे के लिए किया जा रहा है. अगर सत्ता के इस नशे का विरोध करने और इसके खिलाफ प्रदर्शन करने पर प्रदर्शनकारियों को कुचलकर गिरफ्तार किया जाता है, तो इस अराजकता को पूरे देश में जड़ से लेकर शीर्ष तक उखाड़ फेंकना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि क्या इस देश में कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होना चाहिए? क्या आपसे बिल्कुल भी सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए? विरोध करने का अधिकार छीनने वाले आप कौन होते हैं? 3 अक्टूबर से दिल्ली में भ्रष्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. दिल्ली पुलिस को अपने नियंत्रण में रखकर यह सरकार न केवल प्रदर्शनकारियों को कुचल रही है, बल्कि इन प्रदर्शनों को कवर करने वाली महिला पत्रकारों को भी परेशान कर रही है.

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'देश के 20-30 साल के अपने भविष्य को लेकर युवा बेचैन'

राज ठाकरे ने कहा कि आज दिल्ली में विरोध प्रदर्शन होने के डर से मेट्रो सेवा बंद कर दी गई है, सड़कें ब्लॉक कर दी गई हैं, इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं, बस सेवाएं रोक दी गई हैं और प्रदर्शनकारियों को उठाकर हवाई रास्ते से ले जाया जा रहा है. यह कैसा तरीका है? इस देश के 20-30 साल के युवा बेचैन हैं. वे अपना भविष्य नहीं देख पा रहे हैं, इसलिए शांतिपूर्ण ढंग से सड़कों पर उतर रहे हैं, लेकिन आप उन्हें कुचलने की कोशिश कर रहे हैं. PM मोदी अब किस मुंह से दुनिया भर में घूम-घूमकर कहेंगे कि हमारे देश में लोकतंत्र है? क्या लोकतंत्र ऐसा होता है?

उन्होंने आगे कहा कि मुझे समझ नहीं आता कि ज्ञानेश कुमार से इतना प्रेम क्यों है? क्या इसलिए कि ज्ञानेश कुमार और उनसे पहले के चुनाव अधिकारी आपके लिए सत्ता हथियाने का साधन हैं? चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है. अगर उसके प्रमुख ने कुछ गड़बड़ी की है, तो उनका इस्तीफा बिल्कुल जरूरी है. पूरी चुनावी मशीनरी ईमानदार और पारदर्शी होनी चाहिए. इस मांग में गलत क्या है? मेरा वोट छीना जा रहा है या मुझे यह भी पता नहीं है कि मेरा वोट कहां जाता है और किसके पास जाता है. और अपने वोट के अपमान पर गुस्सा जताने का अधिकार भी मुझे नहीं होना चाहिए? या फिर ऊपर बैठे दोनों इस बात से डरते हैं कि अगर ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया और उन्होंने बता दिया कि उनके द्वारा सुगम बनाई गई वोट चोरी का लाभार्थी कौन है, तो अब तक खड़ी की गई सत्ता की पूरी इमारत ढह जाएगी!

भारतीय संविधान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार 

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) के अनुसार नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है. आप इस अधिकार को क्यों कुचल रहे हैं? कल माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी पूछा कि मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है? खैर, महाराष्ट्र में पुलिस आमतौर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेती है और फिर छोड़ देती है.

मनसे प्रमुख ने ये भी कहा कि ऐसा करते समय वह यह सुनिश्चित करती है कि नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन न हो. लेकिन यहां दिल्ली में विरोध प्रदर्शन को कवर करने वाली महिला पत्रकारों ने शिकायत की है कि पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद उन्हें परेशान किया. अगर प्रदर्शन को कवर करने वालों को परेशान किया जा रहा है, तो प्रदर्शनकारियों के साथ अच्छा व्यवहार किए जाने की क्या गारंटी है?

'लगता है अमित शाह रोज गंभीरता से देखते ये डॉक्यूमेंट्री' 

राज ठाकरे ने कहा कि लगता है कि इस देश के युवाओं ने आपको झुकने के लिए मजबूर किया और धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा, इस बात पर आपका गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ है. अन्ना हजारे आंदोलन के दौरान मोदी-शाह ने गुजरात में विरोध प्रदर्शनों की इजाजत दी, क्योंकि वे उनके लिए फायदेमंद थे. लेकिन उसी गुजरात में सत्ता में रहते हुए उन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ हुए कई विरोध प्रदर्शनों को कुचल दिया. संक्षेप में, यह बिल्कुल साफ है कि वे भिखारी और पाखंडी हैं.

नेटफ्लिक्स पर 'How to Become a Tyrant' नाम की एक डॉक्यूमेंट्री है, जिसका अर्थ है 'तानाशाह कैसे बनें'. लगता है कि अमित शाह रोज इस डॉक्यूमेंट्री को बहुत गंभीरता से देखते होंगे. इसके बजाय उन्हें गुजरात के महात्मा गांधी के शांतिपूर्ण आंदोलनों और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में थोड़ा पढ़ना चाहिए, क्योंकि वे स्वयं भी उसी गुजरात से हैं. बेशक, मुझे समझ नहीं आता कि मैं उनसे ऐसी उम्मीद क्यों कर रहा हूं! खैर...

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