महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेस में कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने छात्रों के आंदोलन से लेकर, देश में सत्ता बदलाव और CJP के आंदोलन पर भई अपनी बात रखी. उन्होंने NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के आंदोलन पर चली लाठियों के मुद्दे को एक बार फिर से उठाया है. उन्होंने सवाल किया कि आखिर छात्रों के विरोध प्रदर्शन में कहां अराजकता है? शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जबकि उन छात्रों ने कुछ भी गलत नहीं किया था.
ये बातें उन्होंने मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही हैं. इसके अलावा संजय राउत की 'सत्ता परिवर्तन' वाली टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी है और कहा कि इसको लेकर उनकी राउत से चर्चा हुई है.
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राज ठाकरे ने कहा- उन बच्चों ने कुछ भी गलत नहीं किया था
MNS प्रमुख राज ठाकरे ने NEET परीक्षा को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों पर कहा, "छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान अराजकता कहां है? आपने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बच्चों पर लाठीचार्ज किया, उन्हें पीटा, पुलिस की वर्दी में अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को घुसा दिया और अफरा-तफरी मचा दी, खुद ही हंगामा किया, जबकि उन बच्चों ने कुछ भी गलत नहीं किया था. क्या BJP अपने पुराने दिन और अब तक किए गए अपने सारे काम भूल गई है?" राज ठाकरे ने बीजेपी को सुझाव दिया कि प्रदर्शनकारियों को BJP के अपने ही आंदोलनों के इतिहास की तस्वीरें दिखानी चाहिए.
बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग
राज ठाकरे ने देश में बढ़ते जन-आक्रोश और तथाकथित 'वोट चोरी' के मुद्दों को भी उठाया. उन्होंने बैलेट पेपर से मतदान कराने की अपनी मांग को दोहराया और कहा, "मैं 2018 से ही बैलेट पेपर से वोटिंग की वकालत कर रहा हूं. मैंने इसको लेकर चुनाव आयुक्तों से भी मुलाकात की थी. तब लोगों को यह बात समझ नहीं आई थी, लेकिन अब समझ आ रही है. एक मतदाता को यह तसल्ली होनी चाहिए कि उसका वोट सही तरीके पड़ा है. उसे ये भरोसा होना चाहिए कि उसका वोट सच में बैलेट बॉक्स में चला गया है. जीतना या हारना तो अलग बात है, कौन हारा, कौन जीता ये अलग बात है. पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों के साथ-साथ कई विकसित देशों में भी बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है."
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फ्रांस ने भी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को छोड़ बैलेट पेपर को अपनाया है तो फिर भारत क्यों नहीं कर सकता है. विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ भी नहीं होते हैं. वोटों की गिनती जल्दी हो जाती है, फिर भी नतीजे बहुत देर से आते हैं. अगर इसमें चार दिन लग भी जाएं, तो क्या नुकसान है? इतनी जल्दी क्या है? हमें वापस बैलेट पेपर पर लौट आना चाहिए.
रिजीम चेंज पर कर डाली भविष्यवाणी?
राज ठाकरे ने आगे प्रेस कांफ्रेस में संजय राउत के रिजीम चेंज वाले बयान पर भविष्य में राजनीतिक गितरोध बढ़ने की ओर इशारा किया है और कहा कि अगले 2-5 महीनों के भीतर देश में कुछ बहुत बड़ा होने वाला है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में ऐसा भी हो सकता है कि देश के पास कोई प्रधानमंत्री ही न हो. राज ठाकरे ने सवाल किया, "इस देश में लोकतंत्र कहां है? अमेरिका में लोकतंत्र है, लेकिन यहां नहीं."
राज ठाकरे ने तो यहां तक कह दिया कि अगर आने वाले सालों में देश की जनता सड़कों पर आ जाए, तो उन्हें कोई हैरानी नहीं होगी. उन्होंने ये तक कहा कि अमेरिका में ट्रंप जैसे लोगों की खुलकर आलोचना कर सकते हैं और उन्हें इसके लिए किसी सजा या कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ता, लेकिन भारत में लोकतंत्र नहीं बचा है.
सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर सवाल
राज ठाकरे ने कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर कहा कि आज स्वायत्त संस्थाएं नहीं बची हैं. एक व्यक्ति को हत्या के मामले में जमानत मिल जाती है, लेकिन CJP के दो लोगों लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने के बावजूद गिरफ्तार कर लिया जाता है. बिना कोर्ट का नाम लिए उन्होंने कहा कि आज शीर्ष न्यायिक संस्थाओं को अपने फैसलों की प्रकृति पर विचार करने की जरूरत है. देश के वर्तमान हालात पर चिंता जताई और सवाल किया कि आखिर देश में आज वास्तव में कौन सी संस्थाएं स्वतंत्र या स्वायत्त बची हैं? सरकारी तंत्र और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष और सत्ता के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है.
