संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा चीन का मुद्दा उठाने पर मचे बवाल के बीच शरद पवार की प्रतिक्रिया आई है.

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नेश्नलिस्ट कांग्रेस पार्टी शरद गुट के नेता शरद पवार ने बारामती में पत्रकारों से कहा कि राहुल गांधी को बोलने का अवसर दिया जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि नरवणे, सेना प्रमुख रह चुके हैं, और यदि विपक्ष इस विषय पर चर्चा कर रहा है तो राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने देना चाहिए था.

मैं पीएम को दूंगा किताब- राहुल गांधी

उधर, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री सदन में बोलने आएंगे तो वह व्यक्तिगत तौर पर जनरल एम.एम. नरवणे की किताब उन्हें देंगे. राहुल गांधी ने कहा कि यह नरवणे की पुस्तक है, जिसमें पूरी घटना विस्तार से लिखी गई है.

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राहुल ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि वे इस किताब को सीधे कोट नहीं कर सकते, लेकिन इसकी मुख्य लाइन यही है कि प्रधानमंत्री ने कहा था- 'जो उचित समझो, वह करो. राहुल गांधी के मुताबिक, जब चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन कर बताया कि कैलाश रिज पर चीनी टैंक आ गए हैं और पूछा कि क्या किया जाए, तो पहले कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला.

रायबरेली सांसद ने किया ये बड़ा दावा

रायबरेली सांसद ने कहा- नरवणे ने विदेश मंत्री, एनएसए और अन्य शीर्ष स्तरों पर संपर्क किया, लेकिन निर्णय नहीं आया. बाद में राजनाथ सिंह ने कहा कि वह 'टॉप से पूछेंगे, और वहां से यह आदेश आया कि अगर चीनी फोर्स हमारी सीमा में आती हैं तो बिना पूछे फायर नहीं किया जाएगा. राहुल गांधी ने कहा कि उस समय सेना फायर करना चाहती थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश आया कि 'जो उचित समझो, वह करो. राहुल गांधी का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने अपनी जिम्मेदारी नहीं समझी और फैसला सेना पर छोड़ दिया.

उन्होंने कहा कि नरवणे ने अपनी किताब में लिखा है कि उस वक्त वह बिल्कुल अकेले और असहाय महसूस कर रहे थे, और इसी कारण प्रधानमंत्री जब सदन में आएंगे तो वह यह किताब उन्हें सौंपेंगे.