राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की वरिष्ठ नेता और सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार और विशेष रूप से राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत पर तीखा जुबानी हमला बोला है. पुणे जिले के अहम औद्योगिक क्षेत्र चाकण से उद्योगों के लगातार पलायन पर गंभीर चिंता जताते हुए उन्होंने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया. इसके अलावा, सुले ने शिवसेना और एनसीपी में हुई टूट के लिए चुनाव आयोग (ECI) और एक 'अदृश्य शक्ति' को जिम्मेदार ठहराते हुए लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया है.

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सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि जिस चाकण औद्योगिक क्षेत्र (MIDC) को आदरणीय शरद पवार साहब ने मुख्यमंत्री रहते हुए स्थापित किया था, वहां हजारों उद्योगपतियों ने पवार साहब और महाराष्ट्र की तत्कालीन व्यवस्था पर गहरा विश्वास जताते हुए भारी निवेश किया था. लेकिन आज 'डबल इंजन' सरकार के कार्यकाल में उद्योग वहां से बाहर जा रहे हैं, जो प्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिए बेहद चिंताजनक है.

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उद्योग मंत्री उदय सामंत पर 'फोन वाली राजनीति' का आरोप

उन्होंने उद्योग मंत्री उदय सामंत पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, “उद्योग और व्यापार केवल फोन पर नहीं चलते हैं. जब चुनाव प्रचार के दौरान मंत्रियों की अपनी सीट खतरे में होती है, तब उन्हें तुरंत चार्टर विमान मिल जाता है. लेकिन जब लाखों गरीब बच्चों की नौकरियां खतरे में होती हैं, तब मुंबई से महज ढाई घंटे की दूरी पर स्थित चाकण जाने के लिए राज्य के उद्योग मंत्री के पास समय नहीं होता. वे रविवार को घर बैठकर फोन पर बैठक करते हैं और सिर्फ उसका प्रचार करने में लगे रहते हैं.”

आंध्र और तेलंगाना बिछा रहे 'रेड कार्पेट'

सुप्रिया सुले ने राज्य सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर वह इस राज्य की उद्योग मंत्री होतीं, तो समस्या की खबर सामने आते ही तुरंत मौके पर पहुंच जातीं. उन्होंने कहा कि आज पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश और तेलंगाना अपने यहां उद्योगपतियों को बुलाने के लिए ‘रेड कार्पेट’ बिछा रहे हैं, जबकि महाराष्ट्र में मौजूद उद्योगों को बनाए रखने की ओर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया जा रहा है. सरकार के इस दावे पर कि 'उद्योग बाहर नहीं गए, केवल कागजों पर मौजूद कंपनियां बंद हुई हैं', सुले ने पलटवार करते हुए पूछा, "अगर उद्योग बाहर नहीं गए हैं, तो चाकण की सड़कों पर रोज दिखाई देने वाले बड़े-बड़े गड्ढे क्या झूठे हैं? सवालों से बचना कोई नेतृत्व नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी लेकर समस्याओं का स्थायी समाधान करना ही असली नेतृत्व कहलाता है."

'शिवसेना केवल उद्धव ठाकरे की, शिंदे को बनानी थी नई पार्टी'

सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रमों और राजनीतिक दलों में हुई टूट पर भी जोरदार हमला बोला. एकनाथ शिंदे गुट पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “यह देश संविधान के अनुसार चलता है. क्या कल कोई दूसरा देश आकर यह दावा कर सकता है कि भारत मेरा है? बिल्कुल नहीं. उसी तरह शिवसेना का मामला भी है. शिवसेना की स्थापना बालासाहेब ठाकरे ने की थी और अपने जीवित रहते हुए उन्होंने पार्टी की पूरी जिम्मेदारी उद्धव ठाकरे को सौंपी थी. इसलिए शिवसेना नैतिक और संवैधानिक रूप से केवल उद्धव ठाकरे की ही है.”

उन्होंने आगे कहा कि अगर एकनाथ शिंदे या किसी अन्य नेता की अलग राजनीतिक राय थी, तो उन्हें राज ठाकरे की तरह अपनी अलग पार्टी बनाकर अपने दम पर राजनीति में खड़ा होना चाहिए था, न कि बनी-बनाई पार्टी को तोड़ना चाहिए था.

चुनाव आयोग और 'अदृश्य शक्ति' पर गंभीर आरोप

एनसीपी (NCP) पर शरद पवार के अधिकार को दोहराते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि पार्टी के संविधान के अनुसार फैसले विधायकों या सांसदों के मतदान से नहीं, बल्कि मूल संस्थापकों के अधिकारों से तय होते हैं. उन्होंने कहा, "शरद पवार इस पार्टी के ‘फाउंडर मेंबर’ हैं और हर कानूनी दस्तावेज उनके पक्ष में है. चुनाव आयोग ने पूरी तरह से गलत तरीके से शरद पवार से उनकी पार्टी छीन ली और हमारे साथ घोर अन्याय किया. इसके पीछे जिस ‘अदृश्य शक्ति’ का हाथ है, उसने महाराष्ट्र के दो बड़े संवैधानिक दलों को तोड़ने का महापाप किया है. चुनाव आयोग का जिस तरह से सत्ता द्वारा दुरुपयोग हुआ, वह हमारे मजबूत लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है."

सुले ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी निराशा जताते हुए कहा कि उन्हें न्याय के मंदिर में सिर्फ "तारीख पर तारीख" मिल रही है, लेकिन मुख्य सुनवाई के लिए समय नहीं मिल पा रहा है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए संकल्प लिया कि "राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी केवल शरदचंद्र पवार की है. जब तक मेरी सांसों में सांस है, तब तक मैं अपने कार्यकर्ताओं के लिए और देश के महान संविधान की रक्षा के लिए यह लोकतांत्रिक लड़ाई पूरी ताकत से लड़ती रहूंगी."

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