शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की नेता और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला. उन्होंने छात्रों के आंदोलन, बेरोजगारी, पेपर लीक, तीन भाषा नीति, क्षेत्रीय भाषाओं, राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी मामले और विपक्ष के नेताओं पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि सरकार जवाबदेही और पारदर्शिता से बच रही है, जबकि जनता लगातार सवाल पूछ रही है.

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के इस बयान पर कि छात्रों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी चाहिए, माफी नहीं बल्कि जवाब चाहिए, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि छात्रों की नाराजगी की वजह सरकार का रवैया है.

उन्होंने कहा, "सबसे पहले तो मैं कह दूं कि नहीं, छात्रों के मुद्दों को प्रभावी तरीके से संबोधित नहीं किया जा रहा है. तभी यह असंतोष का माहौल बना हुआ है और उपचुनावों ने भी इसे दिखाया है. जिस तरह बच्चों पर लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस छोड़ी गई, पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ और बिहार में तो AK-47 तक का इस्तेमाल हुआ, सरकार को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए."

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उन्होंने आगे कहा कि एक 15 वर्षीय लड़की और उसकी विधवा मां को भी निशाना बनाया गया और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई. उनके मुताबिक, ऐसी घटनाएं छात्रों के मन में लंबे समय तक बनी रहेंगी और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.

'22 बच्चों की मौत को नहीं भूल सकते'

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि गलत भाषा का इस्तेमाल निश्चित रूप से गलत है, लेकिन केवल उसी मुद्दे को बार-बार उठाकर उन 22 बच्चों की मौत को नहीं भुलाया जा सकता, जिनके परिवार आज भी दुख झेल रहे हैं. उन्होंने कहा कि जिन छात्रों पर लाठियां चलीं और आंसू गैस छोड़ी गई, वे भी इस घटना को जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे.

राहुल गांधी द्वारा बीजेपी और आरएसएस पर संघीय ढांचे और क्षेत्रीय भाषाओं की अनदेखी के आरोप पर प्रियंका चतुर्वेदी ने सहमति जताई. उन्होंने कहा, "जिस तरह महाराष्ट्र में तीन भाषा को लेकर विवाद हुआ, वहां तीसरी भाषा लाकर स्थानीय भाषा को दरकिनार करने की कोशिश की जा रही थी. उसकी लड़ाई हमने महाराष्ट्र में लड़ी और हमें जीत मिली."

उन्होंने आगे कहा, "यह आदत बन गई है कि हमारा ही विचार सही है और वही सब पर थोपा जाए. क्या पहनना है, कौन सी भाषा बोलनी है, कब बोलना है, अगर बोलेंगे तो ट्रोल करना है और चुप कराना है. यह भारतीय जनता पार्टी का एजेंडा बन चुका है."

सैनिक स्कूल और चयन प्रक्रिया पर क्या कहा

सैनिक स्कूलों में चयन प्रक्रिया को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा, "Transparency और accountability बेहद जरूरी है. जनता के साथ लगातार संवाद होना चाहिए. जब सरकार इन चीजों को नजरअंदाज करती है तो पूरे देश में विरोध प्रदर्शन होते हैं. अगर सरकार इससे भी सबक नहीं सीखती तो उसका राजनीतिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा."

उदयनिधि स्टालिन मामले पर प्रतिक्रिया

उदयनिधि स्टालिन से जुड़े मामले पर उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल बिल्कुल गलत है. उन्होंने कहा, "किसी महिला के बारे में अभद्र टिप्पणी करना गलत है. राजनीति से जिनका कोई संबंध नहीं है, उन्हें सिर्फ रिश्तों के आधार पर विवाद में घसीटना उचित नहीं है. महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व की बात तो की जाती है, लेकिन उन्हें बराबरी का सम्मान नहीं दिया जाता."

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि "जो टिप्पणी की गई, वह पूरी तरह गलत थी. लेकिन उन्हें जेल भेजना और बाद में हाई कोर्ट के आदेश पर तुरंत रिहा करना यह दिखाता है कि सत्ता का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए."

राम मंदिर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह कोई सामान्य विवाद नहीं बल्कि आस्था से जुड़ा मामला है. उन्होंने कहा, "यह सिर्फ उत्तर प्रदेश का मामला नहीं है. राम मंदिर 500 साल के संघर्ष और सनातन आस्था का प्रतीक है. अगर वहां चोरी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. जो भी जिम्मेदार हो, चाहे कितना भी बड़ा व्यक्ति क्यों न हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए."

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक लाभ लेने के समय आगे रहती है, लेकिन जवाबदेही की बारी आने पर पीछे हट जाती है. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईटी के गठन को लेकर सवाल उठाए थे और जांच निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए.

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झारखंड के छात्र आंदोलन का किया समर्थन

झारखंड में पेपर लीक और भर्ती परीक्षा से जुड़े आंदोलन पर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "जहां भी छात्र इतने दिनों से आंदोलन कर रहे हैं और एक छात्र अनशन पर बैठा है, वहां उनकी मांगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की कोशिश करनी चाहिए."

उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से एक जैसी शिकायत सामने आ रही है और वह है पेपर लीक. सरकारों की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए.

सुनेत्रा पवार पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों को लेकर प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि राजनीति में मुद्दों पर लड़ाई होनी चाहिए, निजी हमले नहीं. उन्होंने कहा, "सुनेत्रा पवार राज्यसभा की जिम्मेदार सदस्य रही हैं और अब उपमुख्यमंत्री हैं. किसी भी नेता को अपनी बात स्थापित करने में समय लगता है. महिलाओं को निशाना बनाना किसी भी राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता. ऐसी राजनीति से बचना चाहिए."

संसद में जवाब देने से बच रही है सरकार: प्रियंका

मल्लिकार्जुन खरगे के इस आरोप पर कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह संसद में राम मंदिर और छात्र आंदोलन जैसे मुद्दों पर जवाब देने से बच रहे हैं, प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि विपक्ष का आरोप सही है.

उन्होंने कहा, "जब राम मंदिर का उद्घाटन हुआ और प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सबसे आगे थे. लेकिन जब जांच और जवाबदेही की बात आती है तो उन्हें सामने आना चाहिए. राजनीतिक फायदा लेने के समय आगे रहना और जिम्मेदारी के समय पीछे हट जाना ठीक नहीं है. संसद से बड़ा जवाबदेही का कोई मंच नहीं है और सरकार को वहां जवाब देना चाहिए."

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