मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा (23 मार्च) को संबोधित किया. इस पर शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत की प्रतिक्रिया सामने आई. उन्होंने कहा कि युद्ध के 25 दिन बाद पीएम मोदी सदन में आए. हमने उनकी बॉडी लैंग्वेज, उनका चाल चलन, उनके बोलने का ढंग ऑब्जर्व किया तो हम सबको लगा कि मोदी डिप्रेशन में हैं. उनका नियंत्रण छूट गया है. मोदी जी की ज्यादा दिन सत्ता में रहने की मानसिकता नहीं दिखती. मोदी खुद ही जाएंगे.

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आपने शांति और विकास को कहां छुपाकर रखा- संजय राउत

हम शांति के साथ खड़े हैं, पीएम मोदी के इस बयान पर उन्होंने कहा, "लगता तो नहीं है कि आप शांति के साथ खड़े हो. ये शांति कहां है? आपने शांति और विकास को कहां छुपाकर रखा है. आप हमें बताइए. शांति क्या होती है, इसके लिए आपको पंडित नेहरू का चरित्र पढ़ना चाहिए. आप पंडित नेहरू और महात्मा गांधी को पढ़िए.''

पीएम मोदी को बहस करनी चाहिए- संजय राउत

'प्रधानमंत्री पार्लियामेंट में डिबेट नहीं कर सकते', राहुल गांधी के इस बयान पर उन्होंने कहा, "पीएम मोदी को बहस करनी चाहिए. इतनी बड़ी समस्या देश के सामने है. आपने खुद कहा कि जो स्थिति कोरोना के समय थी, वो वापस एक बार फिर आ सकती है."

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हमारे सवालों का जवाब मिलना चाहिए- संजय राउत

इसके साथ ही उन्होंने कहा, "हम इतने दिनों से बोल रहे हैं कि ऑल पार्टी मीटिंग बुलाइए और सभी लोगों की राय लीजिए. लेकिन प्रधानमंत्री को जब लगा कि सब कुछ अपने कंट्रोल से बाहर जा रहा है तो तब सदन में आए. हमारे मन में जो सवाल हैं उसका जवाब हमें मिलना चाहिए. कोरोना के समय हमने थालियां और तालियां बजाईं, इस बार क्या बजाना है? सिलेंडर बजाना है क्या, ये बताना चाहिए."

लोकसभा में पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में कहा था कि इजरायल-ईरान युद्ध ने भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. यह जरूरी है कि संसद से एकजुट आवाज दुनिया में जाए. बातचीत और कूटनीति ही समस्या का समाधान है. हमें तैयार रहना होगा और साथ ही एकजुट भी रहना होगा. हम कोरोना काल के दौरान भी इस तरह की चुनौती का सामना कर चुके हैं.