Nashik Mhada Fraud: महाराष्ट्र के नासिक में म्हाडा घरों के कोटे को लेकर एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है. कुछ बिल्डरों पर आरोप है कि उन्होंने जाली दस्तावेज, फर्जी हस्ताक्षर और मुहरों का इस्तेमाल कर सरकार को गुमराह किया. सरकारवाडा पुलिस स्टेशन में कुल 49 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं और जांच जारी है.

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नियमों के अनुसार, किसी भी बिल्डर को 4,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली आवास परियोजना बनाते समय 20 प्रतिशत फ्लैट्स म्हाडा के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है. यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के नागरिकों को किफायती दर पर घर उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थी. लेकिन नासिक के कुछ बिल्डरों ने जानबूझकर परियोजना का क्षेत्रफल कम दिखाया और जाली दस्तावेजों के जरिए सरकार को गुमराह किया.

49 मामलों में धोखाधड़ी का खुलासा

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इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया कि कुछ परियोजनाओं के उपखंड 2013 से पहले के होने का दिखावा कर 20 प्रतिशत फ्लैट्स जमा नहीं किए गए. भूमि अभिलेख कार्यालय ने कुल 128 मामलों की जांच की, जिसमें 49 मामलों में सरकार को धोखा देने का खुलासा हुआ. इसके बाद भूमि अभिलेख विभाग की शिकायत पर सरकारवाडा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई.

घोटाले में सरकारी कर्मचारी शामिल

भूमि अभिलेख विभाग की शिकायत के अनुसार इस घोटाले में भूमि अभिलेख, राजस्व विभाग और म्हाडा तीनों विभागों को गुमराह किया गया. अलग-अलग सर्वे नंबर के आधार पर मामले दर्ज किए गए हैं. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितने बिल्डर और सरकारी कर्मचारी इस घोटाले में शामिल हैं. प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस पूरे घोटाले में सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है. 

फिलहाल जांच अभी जारी है और जनता तथा मीडिया की निगाहें इस पर लगी हैं कि जल्द ही बड़े बिल्डरों और संभवतः सरकारी कर्मचारियों के नाम सामने आएंगे. 49 मामलों में शामिल सभी आरोपियों और उनके लाभ का पूरा खुलासा होने की उम्मीद है.