नियति का खेल भी कितना अजीब होता है. जो लड़का डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज करने का सपना देख रहा था, उसे हालात ने मुंबई की सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर कर दिया. लेकिन मुंबई की मलाड पुलिस की सतर्कता से इस भटके हुए छात्र की न सिर्फ जान बची, बल्कि वह अपने परिवार से भी मिल सका.

Continues below advertisement

यह कहानी नांदेड़ के रहने वाले 22 वर्षीय अभय टेकालेकर की है, जो होम्योपैथी (BHMS) के तीसरे वर्ष का छात्र है. करीब डेढ़-दो महीने पहले एक ट्रेन यात्रा के दौरान अभय का बैग चोरी हो गया था. उस बैग में ही उसके परिवार के संपर्क नंबर, पैसे और सभी जरूरी दस्तावेज रखे थे.

पैसे खत्म होने, मोबाइल न होने और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने के कारण अभय अपने घर का नंबर भी भूल गया. धीरे-धीरे वह मुंबई की सड़कों पर भटकता चला गया. उसने अपने दिन मंदिरों, रेलवे प्लेटफॉर्म और बस स्टॉप पर बिताए और आखिरकार पेट भरने के लिए भीख मांगने लगा.

Continues below advertisement

महाराष्ट्र में हाई-ड्रामा! हल्दी समारोह के दिन लापता हुई दुल्हन, प्रेमी पति ने दर्ज कराई शिकायत

पुलिस कांस्टेबल की पारखी नजर ने बदली किस्मत

मलाड पुलिस इन दिनों सड़कों से भिखारियों को हटाकर उनके पुनर्वास के लिए एक विशेष अभियान चला रही है. इसी दौरान एसवी रोड (SV Road) पर फुटपाथ के किनारे बैठे अभय पर कांस्टेबल कोमलसिंह जाधव की नजर पड़ी.

कांस्टेबल ने देखा कि युवक की हालत खराब है, लेकिन उसके बातचीत करने का तरीका किसी पढ़े-लिखे इंसान जैसा है. शक होने पर पुलिस उसे थाने ले आई. जब पुलिस ने उससे प्यार से पूछताछ की, तो उसने बताया कि वह होम्योपैथी का छात्र है और बस अपने घर जाना चाहता है.

आंसुओं के साथ हुआ परिवार का मिलन

पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद उसके परिवार की जानकारी जुटाई और नांदेड़ में उनसे संपर्क किया. जानकारी मिलते ही परिवार मुंबई पहुंच गया. अभय के पिता एक शिक्षक हैं और उसका भाई एक डॉक्टर है. लंबे समय बाद अपने बेटे को इस हाल में जिंदा देखकर माता-पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े. पुलिस की इस मानवीय पहल की हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है.

बकरीद से पहले मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की वॉर्निंग! 'अगर महाराष्ट्र में गाय काटी तो...'