देश की सबसे अमीर महानगरपालिका बीएमसी में सत्ता को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. खासतौर पर मुंबई मेयर पद को लेकर महायुति के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है. बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना दोनों ही इस अहम पद पर अपना दावा ठोक रही हैं.

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मुंबई महानगरपालिका के मेयर पद को लेकर भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. दोनों ही दल बीएमसी में अपनी-अपनी ताकत के आधार पर मेयर पद चाहते हैं. यह लड़ाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि बीएमसी का बजट कई राज्यों से बड़ा है.

दिल्ली में हुई अहम बैठक

इस सियासी खींचतान के बीच शिवसेना के पूर्व सांसद राहुल शेवाले ने कल देर रात दिल्ली में बीजेपी नेताओं के साथ बीएमसी को लेकर चर्चा की. उनकी अमित साटम के साथ संक्षिप्त बैठक हुई, जिसे काफी अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इस बैठक में मेयर पद और वैधानिक समितियों के बंटवारे पर बातचीत हुई.

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सीटें कम, दावा मजबूत

बीएमसी चुनाव में शिवसेना ने बीजेपी के मुकाबले कम सीटें जीती हैं, फिर भी वह मेयर पद पर जोरदार दावा कर रही है. शिवसेना का तर्क है कि मुंबई उसकी पारंपरिक राजनीतिक जमीन रही है और प्रशासनिक अनुभव के लिहाज से मेयर पद उसी के पास रहना चाहिए.

दूसरी ओर बीजेपी इस बार मुंबई में अपना मेयर बनाकर नया इतिहास रचने की तैयारी में है. पार्टी का कहना है कि उसे सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं, इसलिए मेयर पद पर पहला हक उसका बनता है. साथ ही बीएमसी की वैधानिक समितियों पर कब्जे को लेकर भी दोनों दलों के बीच जबरदस्त रस्साकशी चल रही है.

बहुमत महायुति के पास

बीएमसी चुनाव में बहुमत बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के पास है. बहुमत के लिए जरूरी 114 सीटों से 4 ज्यादा सीटें दोनों दलों ने मिलकर हासिल की हैं. बीजेपी को 89 और शिवसेना को 29 सीटें मिली हैं. ऐसे में सवाल यही है कि मेयर की कुर्सी आखिर किसके हिस्से आएगी.