महाराष्ट्र स्थापना दिवस (Maharashtra Day) के मौके पर राज्य में एक बार फिर 'मराठी भाषा की सख्ती' का मुद्दा गरमा गया है. महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाईक ने साफ अल्टीमेटम दिया है कि राज्य में कारोबार करने वाले, ऑटो और टैक्सी चलाने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा आनी ही चाहिए.

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उन्होंने कहा कि इस भाषाई सख्ती और राजनीतिक बयानबाजी के बीच 'उत्तर भारतीय समाज' ने बेहद सकारात्मक और अनोखा जवाब दिया है. मुंबई में उत्तर भारतीयों के सबसे बड़े संगठन 'उत्तर भारतीय संघ' ने मराठी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सिलाई मशीनें बांटी हैं और मराठी सीखने का चैलेंज भी स्वीकार कर लिया है.

'चैलेंज मंजूर, 15 अगस्त तक सीखेंगे बेसिक मराठी'

उत्तर भारतीय संघ के कार्यक्रम में पहुंचे बीजेपी नेता कृपाशंकर सिंह ने भाषा विवाद पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा, "अगर उत्तर भारतीय यहां आकर संघर्ष कर सकता है, तो उसके लिए मराठी सीखना कोई कठिन काम नहीं है. हम मराठी भाषा सीखने का चैलेंज स्वीकार करते हैं." उन्होंने ऐलान किया कि 15 अगस्त तक उत्तर भारतीय बेसिक बोलचाल की मराठी सीख लेंगे. कृपाशंकर सिंह ने वादा किया कि अगले महाराष्ट्र दिवस पर यूपी का ऑटो वाला भी सबके साथ महाराष्ट्र का राजकीय गीत गाएगा.

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मराठी महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की पहल

कार्यक्रम के दौरान उत्तर भारतीय संघ के अध्यक्ष संतोष आर.एन. सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र ने उत्तर भारतीयों को मान-सम्मान और रोजगार दिया है, इस ऋण को चुकाया नहीं जा सकता. उन्होंने कहा, "मराठी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि यहां की आत्मा है और हमें इस पर गर्व है. 'जय महाराष्ट्र' सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि हमारे दिल से निकली भावना है. हमारी महाराष्ट्र की बहनें सशक्त और स्वावलंबी बनें, इसलिए संघ की तरफ से जरूरतमंद मराठी बहनों को सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अपने परिवार की मदद कर सकें."

उत्तर भारतीय संघ खुद सिखाएगा मराठी

मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर उत्तर भारतीय संघ ने एक बड़ा फैसला लिया है. संघ द्वारा संचालित संस्थानों में अब मराठी सीखने वालों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम (Special Training Program) आयोजित किए जाएंगे.

संतोष सिंह ने स्पष्ट किया कि मराठी हमारे संतों और छत्रपति शिवाजी महाराज की भाषा है. मुंबई में रहने और रोजगार करने वाले सभी उत्तर भारतीयों को इसे सीखने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य के जो नेता मराठी आने की बात कह रहे हैं, वे अपनी जगह सही हैं; थोड़ी बोलचाल की भाषा सीखने से समाज में अपनापन और बढ़ता है.

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