मराठा समाज के कार्यकर्ता और आरक्षण आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार मनोज जरांगे पाटील ने एक बार फिर मार्च का ऐलान किया है. आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदाय मुंबई की ओर दोबारा मार्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है. इस बीच मनोज जरांगे ने देवेंद्र फडणवीस सरकार को बड़ी चेतावनी दी है. 

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मनोज जरांगे का कहना है, "अगर सरकार अपना वादा तोड़ती है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. अगर देवेंद्र फडणवीस मराठा समुदाय को आरक्षण नहीं देना चाहते, तो वे हैदराबाद गजट का सरकारी आदेश जारी नहीं करते." उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि मराठा समाज अपने अधिकारों और आरक्षण के लिए पूरी तरह जागरूक और संगठित है.

क्या है हैदराबाद गजट?

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मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए सरकार पुराने 'हैदराबाद गजट' को लागू करने की बात कर चुकी है. यह गजट निजाम हैदराबाद की रियासत की अधिसूचना है, जिसमें कुनबी यानी किसान जाति को आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा वर्ग बताया गया था. मनोज जरांगे का मानना है कि मराठा और कुनबी बराबर हैं. इसलिए मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी जाति का प्रमाणपत्र दिया जाए और उन्हें आरक्षण मिले. 

देवेंद्र फडणवीस सरकार ने हैदराबाद गजट को कुनबी-मराठा पहचान के प्रमाण के तौर पर मान्यता देने की बात कही है. दरअसल, 1947 से पहले मराठवाड़ा, हैदराबाद रियासत का हिस्सा हुआ करता था. आज यह महाराष्ट्र में है और राज्य के 8 जिले इसमें शामिल हैं. मराठवाड़ा की जनसंख्या, जातियों और समुदायों, व्यवसायों, कृषि आदि से जुड़े सभी अभिलेख हैदराबाद गजट में शामिल थे. 

मनोज जरांगे की मांगें क्या हैं?

1. मराठा समाज को कुनबी दर्जा दिय जाए. 

2. सरकारी आदेश जारी हो, जिसमें मराठाओं को नौकरी और शिक्षा में आरक्षण का सीधा लाभ मिले

3. सभी पुराने केस वापस लिए जाएं

4. प्रदर्शनकारियों पर एक्शन लेने वाले पुलिसकर्मियों का सस्पेंशन

5. प्रदर्शनकारियों को सुरक्षा दी जाए, उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई न करे.