मराठा समाज को आरक्षण दिलाने की मांग करते हुए मनोज जरांगे पाटील ने एक बार फिर अनशन का हथियार उठाया है. पिछले 6 दिनों से जरांगे पाटील अंतरवाली सराटी में अनशन पर बैठे हैं और बीते दो-तीन दिन से उनकी तबीयत चिंताजनक बताई जा रही है. आज (गुरुवार, 3 सितंबर) अनशन का छठा दिन है और उनकी तबीयत और बिगड़ती नजर आ रही है. इस बीच बुधवार, 2 सितंबर की शाम बीजेपी नेता के आग्रह पर मनोज जरांगे पाटील ने पानी पिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि वह केवल पानी और सलाइन के लिए राजी हैं, अनशन नहीं तोड़ेंगे.

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मनोज जरांगे के अनशन के कारण राज्य का राजनीतिक और सामाजिक माहौल धीरे-धीरे गरमाता दिखाई दे रहा है. मंगलवार (1 सितंबर) को ही सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने अंतरवाली सराटी पहुंचकर जरांगे पाटील से मुलाकात की थी. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कहा था कि सरकार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक है. इसके बाद दो सितंबर को बीजेपी नेता विधायक प्रसाद लाद ने उन्हें अपने हाथों से पानी पिलाया.

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बातचीत के जरिए समाधान निकालने के संकेत

मुलाकात के बाद सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आंदोलन को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया था. राधाकृष्ण विखे पाटील ने भी सरकार की भूमिका रखते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालने के संकेत दिए. सरकार का कहना है कि मनोज जरांगे पाटील मसौदे को लेकर अपनी बात रखें. सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि अगर मसौदे में कोई खामी होगी, तो उसे दूर किया जाएगा. 

मनोज जरांगे की मांग क्या है?

जानकारी के लिए बता दें कि मनोज जरांगे की मुख्य मांग है कि मराठा समुदाय को OBC श्रेणी के तहत कुनबी जाति के प्रमाण पत्र दिए जाएं. कुनबी समुदाय कृषि आधारित है और ओबीसी कैटेगरी में आता है. मनोज जरांगे ने दावा किया है कि मराठा और कुनबी समुदाय की एक ही वंशावली है और इसे साबित करने वाले 58 लाख रिकॉर्ड मिले हैं. इस बीच जरांगे ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन मुंबई तक जाएगा.

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