पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने गुरुवार (6 मई) को विधायकों के साथ बैठक की. उन्होंने एक बार फिर इस्तीफा न देने की बात कही. बैठक में ममता बनर्जी ने विधायकों से कहा कि वो इस्तीफा नहीं देंगी, उन्हें निकालने दो. इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक प्रक्रिया से चलना पड़ता है. संविधान कहता है कि हर पांच साल के बाद सरकार बदलती है. अगर आप जीतते हैं तो फिर से सरकार बनाते हैं और हारते हैं तो कुर्सी छोड़ते हैं.
आनंद दुबे ने आगे कहा, ''ममता दीदी भावनाओं में बहकर ये बात कहीं हैं क्योंकि उनका इमोशनल टच रहा है, पंद्रह साल से लगातार वो जीत रहीं थीं. मुख्यमंत्री के रूप में काम किया और अचानक वो हारीं हैं तो ये होता है कि मैं कुर्सी नहीं छोड़ूंगी, नहीं जाऊंगी, नहीं हटूंगी, लेकिन कुर्सी को छोड़ना पड़ता है. दिल पर पत्थर रखकर कभी-कभी समझौते करने पड़ते हैं.''
टीएमसी चाहे तो फिर से खड़ी हो सकती है- आनंद दुबे
उन्होंने कहा, ''हमें ये लगता है कि गवर्नर के पास वो शक्ति है कि वो नया मुख्यमंत्री चुनकर देते हैं, ये प्रक्रिया है. अब हार जीत समाप्त हो चुका है. अब बीजेपी जीत चुकी है. हमें लगता है कि बीजेपी को पश्चिम बंगाल के विकास के लिए काम करना चाहिए. पश्चिम बंगाल में 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी 29 सीटें जीती थी. मतलब टीएमसी का वहां पर प्रभाव है. टीएमसी चाहे तो फिर से खड़ी हो सकती है.''
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ममता दीदी को इस्तीफा दे देना चाहिए- आनंद दुबे
आनंद दुबे ने उम्मीद जताते हुए कहा कि ममता दीदी चाहें तो पांच साल के बाद जब 2031 में चुनाव होंगे तो फिर से वो सीएम बन सकती हैं. बस मेहनत करने की जरूरत है. छोटी-छोटी बातों से मन दुखी करके काम नहीं चलेगा. उन्होंने कहा, ''ममता दीदी को इस्तीफा दे देना चाहिए और नए जो भी मुख्यमंत्री आएंगे उनके साथ सहयोग करके राज्य को आगे बढ़ाने के लिए सोचना चाहिए.''
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