महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनावों के नतीजों ने राज्य की सियासत में 'महायुति' और विशेषकर भारतीय जनता पार्टी के दबदबे को एक नई ऊंचाई दी है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस ऐतिहासिक जीत के पीछे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के 'विकसित महाराष्ट्र' का विजन और बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की जमीन पर की गई सटीक घेराबंदी सबसे प्रमुख कारण रही है.

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चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि शहरी मतदाताओं ने फडणवीस के विकास कार्यों पर मुहर लगाई है. वहीं, प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने जिस तरह सांगठनिक ढांचे को मजबूत किया, उसका सीधा लाभ पार्टी को मिला. पिछले वर्ष पदभार संभालने के बाद चव्हाण ने राज्य में डेढ़ करोड़ प्राथमिक सदस्य बनाने का जो लक्ष्य पूरा किया था, उसने चुनाव से पहले ही बीजेपी की जीत की नींव रख दी थी.

'इलेक्शन रेडीनेस' और फडणवीस-चव्हाण का समन्वय

बीजेपी की इस सफलता का बड़ा श्रेय 'देवेंद्र और रविंद्र' की जोड़ी के बीच के बेहतर तालमेल को दिया जा रहा है. एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री फडणवीस ने नीतियों और सरकार के कार्यों को जनता तक पहुँचाया, वहीं रविंद्र चव्हाण ने 'इलेक्शन रेडीनेस' (चुनावी तत्परता) वाली कार्यशैली से बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखा. सार्वजनिक निर्माण मंत्री के रूप में उनके अनुभव और पूरे राज्य के दौरों ने उन्हें स्थानीय कार्यकर्ताओं से सीधा जोड़ा, जो आज चुनावी जीत में 'ट्रम्प कार्ड' साबित हुए.

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आलोचनाओं का दिया करारा जवाब

चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष ने रविंद्र चव्हाण के पहनावे और बयानों पर तीखी व्यक्तिगत टिप्पणियाँ की थीं. हालांकि, इन आलोचनाओं से विचलित होने के बजाय चव्हाण ने विपक्ष को गैर-जरूरी मुद्दों में उलझाए रखा और पर्दे के पीछे अपनी चुनावी बिसात बिछाते रहे. नतीजों ने साफ कर दिया है कि जनता ने व्यक्तिगत छींटाकशी को नकार कर केवल 'काम' को प्राथमिकता दी है.

रणनीतिक परिपक्वता का उदय

25 वर्षों के राजनीतिक सफर के बाद, रविंद्र चव्हाण अब महाराष्ट्र की राजनीति में एक परिपक्व और दूरदर्शी नेता के रूप में स्थापित हो गए हैं. देवेंद्र फडणवीस उनकी सांगठनिक क्षमताओं से भली-भांति परिचित हैं, यही कारण है कि सरकार और संगठन के बीच यह समन्वय बीजेपी के लिए अभूतपूर्व सफलता लेकर आया है.