महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने पांच प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थलों के विकास में तेजी लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने पहली बार विकास योजनाओं का समय पर और कुशल तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए पहली बार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारियों को निगरानी के लिए नियुक्त किया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के मुताबिक, ये अधिकारी परियोजना की प्रगति की नियमित समीक्षा करेंगे और सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को रिपोर्ट करेंगे। इसमें कहा गया कि विकास योजनाओं को पहले ही उच्च स्तरीय समिति की बैठकों में मंजूरी दी जा चुकी है और सरकारी आदेश (जीआर) जारी किये जा चुके हैं। 

5 ज्योतिर्लिंगों के लिए के लिए ये अधिकारी हुए नियुक्त

  • भीमाशंकर (पुणे) – वी. राधा, अतिरिक्त मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग
  • घृष्णेश्वर (छत्रपति संभाजीनगर) – बी. वेणुगोपाल रेड्डी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग
  • त्र्यंबकेश्वर (नाशिक) – सौरभ विजय, प्रधान सचिव, वित्त विभाग
  • औंढा नागनाथ (हिंगोली) – ऋचा बागला, प्रधान सचिव, वित्त विभाग
  • परली वैजनाथ (बीड)– आप्पासाहेब धुलाज, सचिव, अन्य पिछड़ा बहुजन कल्याण विभाग

कहां कितने रुपये किए जा रहे हैं खर्च?

श्री क्षेत्र भीमाशंकर विकास आराखड़े के अंतर्गत 148 करोड़ 37 लाख रुपये की लागत से लगभग 11 कार्यों को मंजूरी दी गई है. घृष्णेश्वर विकास योजना की कुल राशि 156 करोड़ 63 लाख रुपये है.

त्र्यंबकेश्वर के लिए 15 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत से 275 विकास कार्यों की योजना बनाई गई है. परली वैजनाथ के लिए तैयार योजनाओं में 286 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से 92 कार्यों को मंजूरी दी गई है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय ने कहा कि इन सभी प्रोजेक्ट्स को गति देने, कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने और उन्हें उचित योजना के अनुसार लागू करने के लिए संबंधित अधिकारी नियमित रूप से समन्वय बनाए रखेंगे.