महाराष्ट्र विधान परिषद के पूर्व सदस्य और जाने-माने शिक्षाविद् डॉ. अशोक गजानन मोडक का शुक्रवार (3 जनवरी) देर रात निधन हो गया. वह 85 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे थे. उन्होंने मुंबई के पवई स्थित एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनके निधन की जानकारी उनके बेटे आशीष मोडक ने दी.

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डॉ. अशोक मोडक के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं. उनके निधन से राजनीतिक, शैक्षणिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. कई नेताओं, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है.

शिक्षाविद् और सोवियत अध्ययन के विशेषज्ञ थे डॉ. मोडक

जानकारी के अनुसार, डॉ. मोडक एक प्रख्यात शिक्षाविद् और सोवियत अध्ययन के विशेषज्ञ थे. उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया. उन्होंने 40 से अधिक पुस्तकें लिखीं और 120 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित किए, जो आज भी छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी माने जाते हैं.

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राजनीतिक जीवन की बात करें तो डॉ. मोडक ने वर्ष 1994 से 2006 तक महाराष्ट्र विधान परिषद में कोंकण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. 12 वर्षों के कार्यकाल में वह अपने क्षेत्र के विकास के लिए पूरी तरह समर्पित रहे. खासकर दूरदराज के आदिवासी इलाकों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने विधान परिषद निधि का प्रभावी उपयोग किया.

वर्ष 1997 में उन्हें मिला था 'सर्वश्रेष्ठ सांसद' पुरस्कार

संसदीय बहसों में उनके सार्थक और ज्ञानपूर्ण योगदान के लिए वर्ष 1997 में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ सांसद’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. डॉ. मोडक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्पित स्वयंसेवक थे और उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं. उनका जीवन शिक्षा, सेवा और विचारधारा के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा है.

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