महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में नाशिक के अशोक खरात मामले की एसआईटी जांच को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. उन्होंने आश्वासन दिया कि अगर इस मामले में कोई सरकारी अधिकारी या राजनीतिक नेता शामिल पाया जाता है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक महिला अधिकारी को एसआईटी का प्रमुख नियुक्त किया गया है.
विपक्ष ने उठाए सवाल
भास्कर जाधव और विजय वडेट्टीवार जैसे विपक्षी नेताओं ने कुछ आईपीएस और राजस्व अधिकारियों की संलिप्तता पर सवाल उठाए और मामले की जांच जज की निगरानी में कराने की मांग की.
लेन-देन के सबूत मिले तो बख्शेंगे नहीं- सीएम
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि केवल किसी के साथ फोटो होने से कोई अपराधी नहीं बन जाता, लेकिन खरात के डिलीट किए गए डेटा की रिकवरी से यदि किसी के आर्थिक लेन-देन या मदद के सबूत मिलते हैं, तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने यह भी साफ किया कि वर्तमान कानूनों के तहत एसआईटी जांच में न्यायिक हस्तक्षेप का प्रावधान नहीं है.
खरात पर दो और मामले दर्ज
वहीं उधर, अशोक खरात के खिलाफ दो और मामले दर्ज किए गए हैं. एक महिला ने खरात पर तीन साल की अवधि में उससे कई बार रेप करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद उसे 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था.
अधिकारी ने बताया कि नए मामले सात महीने की एक गर्भवती महिला के कथित यौन शोषण और एक अन्य महिला को दोबारा शादी कराने का झांसा देकर उसका शोषण किये जाने से संबंधित हैं.
अधिकारी ने कहा, "नवंबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच खरात ने कनाडा कॉर्नर स्थित अपने कार्यालय में गर्भवती महिला से रेप किया. उसने महिला को स्वस्थ संतान की प्राप्ति के लिए अनुष्ठान करने का वादा किया था. महिला की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मानव बलि एवं अन्य अमानवीय, दुष्ट और अघोरी प्रथाओं एवं काला जादू की रोकथाम एवं उन्मूलन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है."
अधिकारी ने बताया कि दूसरा मामला एक महिला की शिकायत पर दर्ज किया गया, जिसने कहा कि उसने और उसके परिजन ने उसकी शादी तय करने के लिए पहली बार 2013 में खरात से मुलाकात की थी.
