Devendra Fadnavis Oath: बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने आज (5 दिसंबर) तीसरी बार महाराष्ट्र के सीएम पद की शपथ ली. 2019 में बीजेपी की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद भी देवेंद्र फडणवीस को महज तीन दिनों में सीएम के पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद ढाई साल तक विपक्ष में भी बैठना पड़ा था.

जून 2019 में महायुति की सरकार बनी तो पार्टी हित के लिए ढाई साल तक डिप्टी सीएम बनने का भी आदेश स्वीकार कर लिया. बीते एक दशक में देवेंद्र फडणवीस को राजनीतिक करियर में कठिन अनुभवों से गुजरना पड़ा लेकिन 2024 के चुनाव के नतीजों ने ना केवल उन्हें सत्ता के शिखर पर पहुंचाया बल्कि महाराष्ट्र की गलियों में उन्हें 'राजनीति का नया चाणक्य' भी कहा जाने लगा. 

नागपुर दक्षिण-पश्चिम सीट से 2009 से ही निर्वाचित होते आ रहे देवेंद्र फडणवीस बीजेपी के पहले नेता रहे हैं जिन्होंने महाराष्ट्र में बतौर सीएम पांच साल (2014-2019) का कार्यकाल पूरा किया है. 

व्यक्तिगत जीवन

ब्राह्मण परिवास से ताल्लुक रखने वाले देवेंद्र फडणवीस का जन्म 22 जुलाई 1970 को नागपुर के गंगाधर फडणवीस और सरिता फडणवीस के घर हुआ था. ऐसा बताया जाता है कि देवेंद्र फडणवीस की प्रारंभिक शिक्षा की शुरुआत इंदिरा कॉन्वेंट से हुई थी लेकिन आपातकाल के दौरान पिता के जेल जाने के कारण उनका यहां से नाम कटवा दिया गया और फिर एडमिशन सरस्वती विद्यालय में करा दिया गया. लॉ ग्रैजुएट फडणवीस के पास बिजनस मैनेजमेंट की भी पढ़ाई की है. फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस एक सिंगर और सोशल वर्कर हैं. फडणवीस के पिता जनसंघ से बीजेपी में आए थे. विधायक भी रहे. गंगाधर फडणवीस को नितिन गडकरी अपना राजनीतिक 'गुरु' मानते हैं.

पहले RSS फिर BJP में एंट्रीदेवेंद्र फडणवीस बीजेपी के उन नेताओं में हैं जिनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत आरएसएस से हुई है. वह बेहद कम उम्र में ही आरएसएस से जुड़ गए थे. उन्हें आगे बीजेपी से जुड़ने का ऑफर मिला और फिर महज 22 साल की उम्र में नागपुर नगर निगम के कॉर्पोरेटर और 27 साल की उम्र में नागपुर के मेयर बन गए. 1999 में पहली बार नागपुर पश्चिम से वह विधायक निर्वाचित हुए थे. दो बार यहां से विधायक रहे. फिर 2009 से नागपुर दक्षिण-पश्चिम सीट से चुनाव लड़ने लगे जो सिलसिला अब तक जारी है. 

महाराष्ट्र बीजेपी की जिम्मेदारी से सीएम तक का  सफर

बताया जाता है कि जब 2014 में कार दुर्घटना में गोपीनाथ मुंडे की मौत हो गई तो देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ खडसे, विनोद तावड़े, सुधीर मुनगंटीवार और पंकजा मुंडे को महाराष्ट्र  विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी दी गई थी. उस वक्त फडणवीस महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष थे. बीजेपी ने 2014 का चुनाव अकेले लड़ा था लेकिन यह बहुमत से 23 सीट कम थी. एनसीपी ने बाहर से समर्थन का ऑफर दिया लेकिन बीजेपी ने अपने पुराने सहयोगी शिवसेना से गठबंधन कर सरकार बनाई और फडणवीस को सीएम बनाया गया.

पहले कार्यकाल में इनपर रही चर्चा

देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के दूसरे सबसे युवा सीएम बने थे. उस वक्त उनकी उम्र महज 44 वर्ष थी. फडणवीस के पहले कार्यकाल की चर्चा मुंबई मेट्रो लाइन, मुंबई-नागपुर समृद्धि महामार्ग, मराठवाड़ा के लिए सिंचाई ग्रिड वाली जल युक्त शिवर योजना को लेकर होती है.

2019 में शिवसेना से अलगाव, फडणवीस की बढ़ी चुनौती

2019 में बीजेपी और शिवसेना ने एकसाथ चुनाव लड़ा. चुनाव के बाद दोनों का गठबंधन टूट गया. फडणवीस ने अजित पवार के गुट की एनसीपी के साथ सरकार बनाई और 23 नवंबर को सीएम पद की शपथ ली. हालांकि एनसीपी द्वारा समर्थन वापस ले लिए जाने पर महज कुछ दिन में ही फडणवीस को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा. दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से सरकार बना ली. वहीं ढाई साल एमवीएम की सरकार के बाद उस वक्त तूफान आया जब एकनाथ  शिंदे के नेतृत्व में 40 शिवसेना विधायकों ने विद्रोह कर दिया और बीजेपी के समर्थन से महायुति की सरकार बनाई.

देवेंद्र फडणवीस की परीक्षा

अब देवेंद्र फडणवीस की कड़ी परीक्षा का वक्त था क्योंकि बीजेपी नेतृत्व ने उन्हें डिप्टी सीएम बनने का आदेश दिया जबकि वह पांच साल सीएम रहे थे. यह फैसला स्वीकारना उनके लिए आसान नहीं था क्योंकि जो व्यक्ति उनके नेतृत्व में काम कर चुका है अब उसके नेतृत्व में उन्हें काम करना था. यानी कि एकनाथ शिंदे सीएम और देवेंद्र फडणवीस डिप्टी सीएम होते. फडणवीस ने इस चुनौती को स्वीकार किया. 

2024 लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव

2024 लोकसभा चुनाव में महायुति को बड़ा झटका लगा. उम्मीद के विपरीत नतीजे आए और महायुति की सीटों की संख्या सिकुड़ गई. महाविकास अघाड़ी 48 में  से 31 सीटें जीत ली. यह विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के लिए एक परीक्षा थी जिसमें वह फेल होती दिखी. देवेंद्र फडणवीस ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की भी पेशकश कर दी. लेकिन पार्टी ने उनपर भरोसा जताया. चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले उनके बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की भी चर्चाएं चलती रहीं. 

इस बीच चुनाव की घोषणा हो गई. चुनाव प्रचार में देवेंद्र फडणवीस का आक्रामक रुख देखने को मिला. उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के 'एक हैं तो सेफ है' और 'बंटेंगे तो कटेंगे' को जोर-शोर से प्रचारित किया तो साथ ही अपने कार्यकाल के काम भी गिनाए. ओवैसी और फडणवीस के बीच वाक-युद्ध भी इस दौरान चर्चा में रहा.

माना जाने लगा कि महायुति की जीत पर बीजेपी देवेंद्र फडणवीस को अपना चेहरा बनाएगी. बीजेपी के लिए परिणाम अप्रत्याशित रहे क्योंकि इसके आंकड़े बहुमत के काफी करीब थे. अप्रत्याशित नतीजों के कारण ही ना तो अजित पवार और ना ही एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस के सीएम बनने की राह में आ पाए. तीनों पार्टियों ने सर्वसम्मति से फडणवीस के  सीएम बनने पर मुहर लगाई. 

...और समंदर लौट आया

नतीजों के बाद सरकार बनाने की कवायद के बीच 2019 विधानसभा में देवेंद्र फडणवीस का दिया भाषण भी खूब वायरल होने लगा, जब सत्ता से बाहर होने के बाद विधानसभा में फडणवीस ने विरोधियों को आगाह करते हुए कहा था, "मेरा पानी उतरा देख कर मेरे किनारे घर मत बसा लेना, मैं समुंदर हूं लौटकर वापस आऊंगा.'' बीजेपी ने अपने 'देवा भाऊ' को एकबार फिर विधायक दल का नेता चुनकर उनकी इस लाइन को सार्थक साबित कर दिया. 

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