मुंबई के बांद्रा टर्मिनस पर एक व्यवसाई से बैग चेकिंग करने के बहाने लाखों की वसूली करने के मामले का खुलासा हुआ है. जीआरपी क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एक महिला अधिकारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है.
कैसे हुआ खुलासा? सूत्रों के मुताबिक, कपड़ा व्यवसाई से बैग चेकिंग के बहाने 24 लाख रुपए नकद वसूले गए थे. लेकिन रेलवे पुलिस के रिकॉर्ड में केवल 10.50 लाख रुपए की जब्ती दिखाकर बाकी रकम गायब कर दी गई. व्यवसाई की शिकायत और बाद में की गई आंतरिक जांच के बाद यह बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया.
इन गिरफ्तार आरोपियों की पहचान डब्लूएएसआई विजया उर्फ मनीषा इंगवले, नीलेश दीपक कलसुलकर और प्रवीण वेदनाथ शुक्ला के रूप में हुई है. विजया इंगवले को इस पूरे रैकेट की मास्टरमाइंड बताया जा रहा है.
नीलेश कलसुलकर और प्रवीण शुक्ला पुराने सहयोगी हैं, जो यात्रियों की गतिविधियों पर नजर रखते थे और इंगवले को जानकारी देकर संदिग्ध बैग वाले यात्रियों को टारगेट बनाने में मदद करते थे.
पुलिस अफसरों की चुप्पी
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इंगवले का हाल ही में बांद्रा रेलवे पुलिस स्टेशन में तबादला हुआ था. इससे पहले वह बोरीवली स्टेशन पर तैनात थी. वहां भी उसने अपने नेटवर्क के साथ मिलकर बैग चेकिंग के नाम पर वसूली की घटनाओं को अंजाम दिया था. कई पीड़ितों ने अब सामने आकर पुराने मामलों की भी शिकायत करने की तैयारी शुरू कर दी है. इस मामले में इतने बड़े खुलासे के बावजूद रेलवे पुलिस आयुक्त और क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारी अब तक चुप्पी साधे हुए हैं. सूत्र बताते हैं कि विभाग के कुछ बड़े अफसर भी इस तरह की अवैध वसूली में परोक्ष रूप से शामिल रहे हैं, जिसकी वजह से कार्रवाई को लेकर ढील बरती जा रही है. आगे की जांच जारी फिलहाल, तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन शामिल था. जांच एजेंसियां इस बात की भी तहकीकात कर रही हैं कि अब तक कितने यात्रियों से इस तरीके से अवैध रूप से रकम वसूली गई और वह रकम कहां-कहां पहुंची.
