केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने गुरुवार को कहा कि विमानन कंपनियों ने भारत के प्रत्येक हज यात्री के लिए हवाई किराये में करीब 30 से 40 हजार रुपये की वृद्धि करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि यह वृद्धि 10 हजार रुपये से अधिक नहीं हो. 

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उन्होंने यह बयान उस वक्त दिया है जब भारतीय हज समिति ने एक परिपत्र के माध्यम से हज यात्रियों से कहा कि वह अतिरिक्त हवाई किराये के रूप में आगामी 15 मई तक 10 हजार रुपये जमा कराएं. इसके बाद सियासत गरमा गई है. महाराष्ट्र एआईएमआईएम नेता वारिस पठान का बयान सामने आया है.

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10 हजार रुपये बढ़ने पर क्या बोले वारिस पठान?

एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा कि हज हर मुसलमान के ऊपर फर्ज है. एक गरीब इंसान जिंदगी भर मेहनत कर पैसा जमा करता है. उसके बाद वह हज जाने की कोशिश करता है. उन्होंने कहा कि हर साल सवा लाख के करीब हाजी हज कमेटी से हज करने के लिए जाते हैं. सरकार बराबर पैसा ले रही है. एक-एक हाजी से 4 लाख के करीब रुपये लिए जा रहे हैं. 

वारिस पठान ने कहा कि इतना पैसा लेने के बाद सुविधा क्या है? 10 हजार रुपये और बढ़ा दिए हैं. एक आम आदमी अगर मुंबई से सफर कर रहा है तो आने-जाने का 80 हजार तो जा ही रहा है. उससे 1 लाख तो वैसे ही हो गया और उसके ऊपर 10 हजार रुपये और ले रहे हो. उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 6-7 हजार की एक घड़ी लेने के लिए अनिवार्य कर दी है.

सरकार पर भड़के वारिस पठान

उन्होंने कहा कि मक्का के अंदर एक होटल से वीडियो सामने आया है. जो हज करने लोग गए हैं उनके साथ किस बर्बरता से सुलूक किया जा रहा है. वहां एक कमरे में 16 लोगों को डाल दिया और उसमें सिर्फ एक वॉशरूम दिया है. महिला, बुजुर्ग और बच्चे कहां जाएंगे. यह किसकी जवाबदेही बनती है. इस पर सरकार को जवाबदेही होना चाहिए.

वारिस पठान ने सरकार से रखी ये मांग

एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने कहा कि भारत सरकार और किरेन रीजीजू से हमारी मांग है कि हज कमेटी के द्वारा जो हाजी वहां गए हैं उनके रहने का बराबर इंतजाम किया जाए. उन्होंने कहा कि एक हाजी सारा पैसा भरकर जा रहा है. यह लोग सिर्फ अफवाह फैला रहे हैं. हम चाहते हैं कि भारत सरकार इस पर संज्ञान लें. ताकि वहां गए हाजियों की तकलीफ खत्म हो.

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