महाराष्ट्र में ऑटो चालकों और दूसरे राज्यों से आए लोगों को लेकर चल रहे मराठी भाषा विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जो लोग महाराष्ट्र से बाहर के हैं और यहां रोजगार के लिए आते हैं, उन्हें स्थानीय भाषा सीखनी चाहिए, लेकिन इसके लिए सरकार को उन्हें पर्याप्त समय देना चाहिए.
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति महाराष्ट्र में रहकर रोजी-रोटी कमा रहा है तो उसे वहां की भाषा से अनजान नहीं रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा सीखना और उसे बोलचाल में लाना जरूरी है. उन्होंने कहा, "मैं यह नहीं कहता कि अगर मैं महाराष्ट्र में रोजी-रोटी कमाता हूं तो मैं यहां की भाषा न जानूं. भाषा जरूर सीखें, लेकिन इसके लिए समय देना चाहिए."
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सरकार को देना चाहिए भाषा सीखने का मौका
गिरिराज सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र से बाहर के लोगों के लिए एक समय सीमा तय की जा सकती है, जिसमें वे मराठी भाषा सीख सकें और उसे अपने दैनिक जीवन में इस्तेमाल कर सकें. उन्होंने कहा कि अचानक किसी पर भाषा थोपने के बजाय लोगों को सीखने और समझने का अवसर दिया जाना चाहिए.
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी हमला बोला. उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी पर सवाल उठाए. गिरिराज सिंह ने कहा, "ये ओछी राजनीति नहीं है तो क्या है? 1984 में जो दंगे हुए, तब भी वो जवान थे. हजारों-लाखों सिखों की हत्या हुई, क्या राहुल गांधी ने कभी माफी मांगी या फिर कभी राजीव गांधी पर केस करवाया?"
मराठी को लेकर पहले भी गिरिराज ने दिया था बयान
बता दें कि इसी साल जनवरी में मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों से पहले भी मराठी भाषा/अस्मिता गिरिराज सिंह का बयान आया था, जिसमें ठाकरे परिवार (राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे) की तरफ से हिंदी भाषियों पर हमलों और मराठी अस्मिता के मुद्दे को लेकर उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकरे परिवार मराठी बनाम गैर-मराठी का मुद्दा उछालकर हिंदुओं के बीच बंटवारा करने की कोशिश कर रहा है.
उन्होंने चुनौती भी दी थी कि अगर ठाकरे बंधुओं में हिम्मत है तो किसी मुस्लिम बहुल इलाके में जाकर ऐसे मुद्दे उठाएं, तभी सच्चाई का अंदाजा होगा. मुस्लिम बहुल इलाकों में उनकी बोलती बंद हो जाती है, लेकिन हिंदुओं को भाषा के नाम पर बांटने की कोशिश करते हैं.
राजनीतिक बयानबाजी तेज
गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद महाराष्ट्र में भाषा और क्षेत्रीय पहचान को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो सकती है. मराठी भाषा को लेकर राज्य में समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं. वहीं, विपक्षी दलों की ओर से भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं. भाषा, रोजगार और स्थानीय अधिकारों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में यह मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है.
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