बिहार सरकार ने अधिकारियों को सांसदों और विधायकों के फोन को तुरंत जवाब देने से जुड़े नियम में बदलाव किया है. अब किसी भी सांसद और विधायक के फोन का अधिकारियों को तुरंत जवाब देना होगा.

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बिहार सरकार ने विधायकों के सम्मान की रक्षा को लेकर अधिकारियों को प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन का आदेश जारी किया है. इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई. 

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क्या है नया प्रोटोकॉल?

सरकार द्वारा जारी आदेश में अधिकारियों से कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों के पद और सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाए. यदि किसी अधिकारी से किसी विधायक या सांसद का फोन कॉल मिस हो जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से तुरंत ‘कॉल बैक’ करना होगा.

इसके अलावा जनप्रतिनिधियों की ओर से भेजे गए पत्रों को लेकर भी सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है. विधायक का पत्र मिलने के बाद अधिकारी को पहले इसकी जानकारी या रसीद संबंधित जनप्रतिनिधि को देनी होगी. इसके बाद पत्र में उठाए गए मामले पर क्या कार्रवाई हुई और काम किस स्थिति में है, इसकी जानकारी तय समय के अंदर लिखित रूप में देनी होगी.

आदेश में और क्या कहा गया?

इसके साथ ही आदेश में कहा गया है कि अगर विधायक किसी काम के सिलसिले में अधिकारी के दफ्तर पहुंचता है तो उसे उसके पद के मुताबिक सम्मान और जरूरी प्रोटोकॉल दिया जाएगा. सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, सभी विभागाध्यक्ष, पुलिस महानिदेशक, सभी प्रमंडलीय आयुक्त व जिलाधिकारियों को इस आशय का पत्र भेजा है.

17 जुलाई को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी, पिछले दिनों हुई बैठक के बाद इस संबंध में शुक्रवार देर रात निर्देश जारी किया गया है. सरकार ने कहा है कि जनप्रतिनिधि जनता और सरकारी व्यवस्था के बीच एक अहम कड़ी हैं इसलिए पुलिस अधिकारियों, प्रमंडलीय आयुक्तों, DM और सभी विभागों के अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा

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