महाराष्ट्र में उच्च शिक्षा हासिल कर रही छात्राओं के लिए सरकार एक नई पहल शुरू करने की तैयारी में है. छात्राओं को आर्थिक रूप से मदद देने के लिए हर महीने 2 हजार रुपये पॉकेट मनी देने का प्रस्ताव रखा गया है. सरकार द्वारा इस योजना के लिए सीएसआर फंड के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है.
उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने छात्रों के साथ संवाद के दौरान इस योजना की जानकारी दी. सरकार की कोशिश है कि आर्थिक कारणों से छात्राओं की उच्च शिक्षा प्रभावित न हो और उन्हें पढ़ाई के दौरान छोटी-मोटी जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता मिल सके.
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शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने दी यह जानकारी
शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने बताया कि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग "कमाओ और सीखो" योजना के आधार पर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही छात्राओं को प्रति माह 2,000 रुपये जेब खर्च के रूप में देने पर विचार कर रहा है. इसको लेकर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग विश्वविद्यालयों और बड़े कॉलेजों के साथ भी बातचीत कर रहा है.
चंद्रकांत पाटील ने बुधवार (19 अगस्त) को मंत्रालय में छात्रों का मार्गदर्शन किया. साथ ही उन्होंने छात्राओं की समस्याओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की. उन्होंने बताया कि इस योजना से उच्च शिक्षा ले रहीं छात्राओं की संख्या में बढ़ोतरी होगी और प्रतिशत बढ़ेगा.
CSR फंड के इस्तेमाल पर किया जा रहा है विचार
इस योजना के लिए CSR फंड का इस्तेमाल करने पर भी विचार किया जा रहा है. प्रस्तावित योजना से राज्य की करीब 12 लाख छात्राओं को लाभ मिलने की संभावना है. इस पहल के जरिए सरकार का उद्देश्य उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है.
हालांकि, योजना को लेकर अंतिम निर्णय और इसके लागू होने की प्रक्रिया अभी तय होना बाकी है. इस दौरान मुंबई विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, खालसा कॉलेज के प्राचार्य, रुईया कॉलेज और सिद्धार्थ कॉलेज के विद्यार्थी भी मौजूद रहे.
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