महाराष्ट्र सरकार हाल ही में राज्य में धर्म स्वतंत्रता बिल लेकर आई है. इस बिल में जबरन धर्मांतरण कराकर शादी करने पर 7 साल की जेल का प्रावधान है. इस बिल को लेकर अब विरोध शुरू हो गया है. ऐसे में अब इस बिल पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या सीएम योगी से भी ज्यादा कट्टर निकले सीएम फडणवीस? 

Continues below advertisement

धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे मुद्दों पर नया कानून लाने वाले राज्यों में एक नया राज्य महाराष्ट्र भी शामिल हो गया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र सरकार ने जो नया कानून प्रस्तावित किया है वो कानून उत्तर प्रदेश में बनाए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या उत्तराखंड में बनाए पुष्कर सिंह धामी या फिर गुजरात के कानून में भी ज्यादा सख्त है.

इसमें ऐसे प्रावधान किए गए हैं कि अब जबरन धर्मांतरण करवाने वालों और लव जिहाद करने वालों की खैर नहीं है. इस बिल में महिलाओं-बच्चों को असीमित अधिकार दिए गए हैं और आरोपियों को कम से कम 10 साल की सजा का प्रावधान है.

Continues below advertisement

महाराष्ट्र सरकार ने पेश किया बिल

महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में जो Freedom of Religion Bill 2026 पेश किया है, उसमें कानून बेहद सख्त हैं. महाराष्ट्र के डीजीपी के नेतृत्व में सात लोगों की एक कमिटी ने मिलकर जो कानून प्रस्तावित किया है उसमें- अवैध धर्मांतरण में लालच, जबरदस्ती, धोखाधड़ी, बल प्रयोग, गलत बयानी, धमकी या अनुचित प्रभाव के जरिए करवाया गया धर्मांतरण तो शामिल है ही, शिक्षा के जरिए ब्रेनवाशिंग से भी करवाए गए धर्मांतरण को अवैध ठहराया गया है.

साथ ही एक ही वक्त में दो या दो से अधिक व्यक्तियों का जबरन धर्मांतरण अवैध है. उपहार, नकदी, रोजगार, धार्मिक संस्थानों में मुफ्त शिक्षा, शादी का वादा, बेहतर जीवनशैली और 'दैवीय उपचार' के बहाने धर्मांतरण को अवैध ठहराया गया है.

वहीं मनोवैज्ञानिक दबाव, शारीरिक बल, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी, या दैवीय नाराजगी का डर दिखाकर या फिर सामाजिक बहिष्कार की धमकी देकर धर्मांतरण को अवैध ठहराया गया है.

अवैध धर्मांतरण की शादी को कोर्ट कर सकता है अवैध घोषित

अवैध धर्मांतरण के उद्देश्य से की गई किसी भी शादी को अदालत की ओर से null and void घोषित करने का प्रावधान रखा गया है. कानून कहता है कि अवैध धर्मांतरण से पैदा हुआ बच्चा अपनी मां के उस धर्म का माना जाएगा, जो धर्म मां का शादी से पहले था. वहीं यह कानून कहता है कि बच्चा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 के तहत भरण-पोषण का हकदार होगा और कस्टडी मां के पास रहेगी.

वैध धर्मांतरण की प्रक्रिया का भी उल्लेख

इस कानून में वैध धर्मांतरण की भी प्रक्रिया का भी उल्लेख है. अगर कोई व्यक्ति खुद ही इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे एक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा. उसे धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति या संस्था को जिला मजिस्ट्रेट को 60 दिन पहले सूचना देनी होगी. साथ ही अधिकारी इस सूचना को सार्वजनिक बोर्ड पर लगाएंगे और 30 दिनों के भीतर आपत्तियां आमंत्रित करेंगे.

ऐसे में आपत्ति मिलने पर पुलिस जांच की जाएगी. धर्मांतरण के 21 दिनों के अंदर जिला मजिस्ट्रेट को एक घोषणा पत्र सौंपना होगा. इसमें अगर घोषणा पत्र नहीं दिया तो धर्मांतरण अवैध माना जाएगा. साथ ही धर्मांतरण करवाने वाले की ये जिम्मेदारी होगी कि वो साबित कर पाए कि वो जो धर्मांतरण करवा रहा है, वो स्वेच्छा से हो रहा है. अगर कोई अवैध धर्मांतरण करने का दोषी पाया जाता है, तो कानून में उसकी सजा का भी निर्धारण किया गया है. 

आखिर कानून क्या कहता है?

प्रस्तावित कानून कहता है कि पीड़ित व्यक्ति, माता-पिता, भाई-बहन, जिनसे खून का रिश्ता हो या फिर जिन रिश्तेदारों ने गोद लिया हो, वो शिकायत दर्ज करवा सकते हैं. इस प्रस्तावित कानून में पुलिस अधिकारी को भी ताकत दी गई है कि अगर उसे लगता है कि कानून का उल्लंघन हो रहा है, तो वो स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज कर सकता है.

इसमें सामान्य अवैध धर्मांतरण के मामले में प्रस्तावित कानून में 7 साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना प्रस्तावित है. वहीं अगर धर्मांतरण नाबालिग, महिला, और SC/ST का हुआ है और अवैध है तो जुर्माना 5 लाख रुपये प्रस्तावित है. इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण पर 7 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना लगेगा और दोबारा अपराध करने पर 10 साल की जेल और 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है.

दूसरे राज्यों से अलग है सीएम फडणवीस का यह बिल

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार का ये प्रस्तावि कानून दूसरे राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात से इस मामले में भी अलग है कि ये प्रस्तावित कानून एक धर्म का दूसरे पर महिमामंडन करने को भी लालच देने के दायरे में रखता है. 

बाकी तो यूपी, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में बात सिर्फ बच्चों के आर्थिक अधिकार की होती है, जबकि महाराष्ट्र का ये प्रस्तावित कानून बच्चे को मां के विवाह पूर्व धर्म से जोड़ता है, जो इसे बिल्कुल ही अलग और सख्त कानून बनाता है. 

दूसरे राज्यों में जहां ये कानून लागू है, वहां मामला दर्ज करने के लिए पीड़ित या उसके रिश्तेदारों की शिकायत जरूरी होती है जबकि महाराष्ट्र में पुलिस को जांच शुरू करने के लिए किसी बाहरी शिकायत की जरूरत नहीं है और वो स्वत: संज्ञान लेकर भी जांच कर सकती है.

धर्मांतरण बिल को लेकर विवाद तय

हालांकि अभी ये बिल प्रस्तावित है और अगर विधानसभा से ये बिल पास होता है तभी कानून की शक्ल ले पाएगा. ऐसे में इस बिल पर विवाद होना तय है, क्योंकि दूसरे राज्यों में भी इस तरह के कानून को सामाजिक संगठनों और विपक्ष के नेताओं ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया है. 

बाकी तो अलग-अलग राज्यों में ऐसे कानून को लेकर मुकदमे भी चल रहे हैं और खुद सुप्रीम कोर्ट कई राज्यों के कानूनों की वैधता की जांच कर ही रहा है. गुजरात और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहले से ही अपने राज्यों के कानूनों की उन धाराओं पर रोक लगा रखी है, जिसमें मर्जी से की गई अंतरधार्मिक शादियों को संदिग्ध माना गया था. ऐसे में महाराष्ट्र सरकार का ये प्रस्तावित बिल अगर विधानसभा से पास होकर कानून बन भी जाता है, तो अदालत में इसे चुनौती मिलना तय है.