बृह्नमुंबई महानगरपालिका चुनाव (BMC Election 2026) में कांग्रेस ने अकेले अपने दम पर लड़ने का फैसला तो लिया है, लेकिन जिन नेताओं के भरोसे बीएमसी का चुनाव जीतने की कोशिश थी, उनमें से कुछ नेता अब पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं. ऐसा ही कुछ मुंबई के मलाड विभाग में हुआ है. कांग्रेस के उत्तर मुंबई जिला महासचिव और झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रकोष्ठ के अध्यक्ष ने पार्टी को बड़ा झटका दिया है. दोनों भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं.

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इतना ही नहीं, बीएमसी चुनाव से पहले इन दो नेताओं के साथ-साथ सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया है. इन सभी को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कराई गई.

वार्ड नंबर 47 में कांग्रेस को बड़ा झटका

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दरअसल, मुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले मलाड में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. वार्ड नंबर 47 में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. कांग्रेस के उत्तर मुंबई जिला महासचिव अरविंद काड्रोस और झोपड़पट्टी पुनर्विकास प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मुरुगन पिल्लई ने आज (शुक्रवार, 2 जनवरी) अपने सैकड़ों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस को अलविदा कहकर बीजेपी में औपचारिक रूप से प्रवेश किया.

यह प्रवेश केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की प्रमुख उपस्थिति में संपन्न हुआ. इस अवसर पर बीजेपी युवा मोर्चा मुंबई अध्यक्ष तेजिंदरसिंह दिवाना सहित पार्टी के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे.

BMC के 16 और वार्डों में कांग्रेस को हुआ नुकसान

एक ओर कांग्रेस के नेता दूसरे दलों में जाकर पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो दूसरी ओर सहयोगी पार्टी वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) ने भी कांग्रेस को बड़ी चोट दे दी है. VBA को सीट शेयरिंग में मिले 16 वार्डों पर पार्टी ने उम्मीदवार ही नहीं उतारे. इनमें से ज्यादातर सीटों पर प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार बीजेपी के हैं. इस चक्कर में वहां बीजेपी को डायरेक्ट फायदा होता दिख रहा है.  

दरअसल, 30 दिसंबर तक सभी दलों को अपने उम्मीदवारों की फाइनल घोषणा कर देनी थी. हालांकि, अंतिम समय तक VBA काबिल कैंडिडेट नहीं खोज पाई. पार्टी की ओर से कहा गया था कि उन्होंने कांग्रेस को जो 16 सीटें वापस की थीं, वहां उन्हें सक्षम कैंडिडेट नहीं मिले. कुछ के पास तो जरूरी कागजात भी नहीं थे, जिस वजह से दिक्कत आ गई. इसलिए पार्टी ने कांग्रेस को इन 16 वार्डों पर अपने उम्मीदवार उतारने की अनुमति दी थी. हालांकि, ऐन वक्त पर कांग्रेस के पास भी उम्मीदवार ढूंढने का समय नहीं था. ऐसे में दोनों पार्टियों के गठबंधन के बावजूद 16 वार्ड खाली रह गए.