महाराष्ट्र में आगामी नगर निगम चुनाव से पहले बीजेपी ने वार्ड नंबर 2 से घोषित अपनी उम्मीदवार पूजा मोरे का नाम वापस ले लिया. यह फैसला 1 जनवरी को सामने आया, जब पार्टी के भीतर लगातार विरोध और सोशल मीडिया पर तेज ट्रोलिंग का दबाव बढ़ता गया. 

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पूजा मोरे को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने खुलकर आपत्ति जताई, जिसके चलते पार्टी नेतृत्व को कदम पीछे खींचना पड़ा और अंततः पूजा मोरे ने चुनावी दौड़ से हटने का फैसला किया. अब इस फैसले के बाद बवाल बढ़ गया है.

पहलगाम हमले पर प्रतिक्रिया बनी मुसीबत!

बीजेपी द्वारा पूजा मोरे को उम्मीदवार घोषित किए जाने के तुरंत बाद पार्टी के भीतर असंतोष उभरने लगा. कई कार्यकर्ताओं ने उनकी उम्मीदवारी का विरोध करते हुए उनके पुराने बयानों को मुद्दा बनाया. पहलगाम हमले पर उनकी शुरुआती प्रतिक्रिया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ अतीत में की गई टिप्पणियां फिर से चर्चा में आ गईं.

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सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो और पोस्ट तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद पूजा मोरे को लगातार ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. यह विरोध केवल ऑनलाइन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीनी स्तर पर भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने दबाव बनाना शुरू कर दिया.

नामांकन वापस लेते समय हुईं भावुक

आंतरिक विरोध के तेज होने के साथ ही पूजा मोरे पर नामांकन वापस लेने का दबाव लगातार बढ़ता गया. अंततः उन्होंने अपनी उम्मीदवारी से हटने का निर्णय लिया. नामांकन वापस लेते समय वह भावुक नजर आईं. एएनआई के अनुसार मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने जीवन और राजनीतिक संघर्ष का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं और उन्होंने जीवन में कई कठिन दौर देखे हैं.

शादी के बाद वह पुणे आईं और किसान आंदोलनों से जुड़कर सक्रिय राजनीति में कदम रखा. उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें पुलिस लाठीचार्ज, आपराधिक मामलों और बार-बार अदालतों के चक्कर काटने पड़े. कई बार कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए उनके पास पैसे तक नहीं थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

छोटी सी गलती को बढ़ा-चढ़ाकर साजिश बनाया- पूजा मोरे 

पूजा मोरे ने विवादों पर सफाई देते हुए कहा कि उनके अतीत की एक छोटी सी गलती को बढ़ा-चढ़ाकर साजिश का रूप दे दिया गया. पहलगाम हमले पर दिए गए बयान को लेकर उन्होंने कहा कि उनकी शुरुआती प्रतिक्रिया घटना के तुरंत बाद की थी. बाद में जब उन्होंने पीड़ितों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की, तब उन्हें समझ आया कि हमला धर्म के आधार पर किया गया था. 

राहुल गांधी के साथ वायरल तस्वीर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फोटो भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ली गई थी, जब वह किसानों से जुड़े मुद्दों पर एक ज्ञापन सौंपने गई थीं. उन्होंने दोहराया कि उन्हें बीजेपी से टिकट मिलना एक जमीनी कार्यकर्ता के लिए दुर्लभ अवसर था. पूजा मोरे ने कहा कि वह बीजेपी की कार्यकर्ता बनी रहेंगी और हिंदुत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ पार्टी के लिए काम करती रहेंगी.