Maharashtra News: बीजेपी ने मंगलवार (25 फरवरी) 11 विधायकों को विधानमंडल समितियों में नियुक्ति किया गया है. अब इस वजह से महाराष्ट्र की महायुति में नाराजगी का माहौल है. क्योंकि शिवसेना और एनसीपी अजित पवार के कोटे की समितियों का बंटवारा अभी बाकी है. 

दरअसल, मंत्रिपद से वंचित बीजेपी विधायकों का राजनीतिक पुनर्वसन चर्चा में महायुती के अन्य सहयोगी दल अब भी प्रतीक्षा में हैं. पिछले कुछ दिनो से बीजेपी से शिवसेना नाराज चल रही थी, लेकिन अब अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस भी इस नियुक्तियों से नाराज है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, मंत्री रवींद्र चव्हाण और रणधीर सावरकर की अगुवाई में इन समितियों के लिए विधायकों की नियुक्ति की गई है.

विभिन्न विधानमंडल समितियों के अध्यक्ष और उनके नाम

समिति का नाम                          अध्यक्ष

सार्वजनिक उपक्रम समिति              राहुल कुल

पंचायत राज समिति                    संतोष दानवे-पाटील

आश्वासन समिति                            रवी राणा

अनुसूचित जाति कल्याण समिति       नारायण कुचे

अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति     राजेश पाडवी

महिला हक्क और कल्याण समिति      मोनिका राजळे

इतर पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति       किसन कथोरे

मराठी भाषा समिति                  अतुल भातखळकर

विशेष हक्क समिति                  राम कदम

धर्मादाय निजी अस्पताल जांच समिति  नमिता मुंदडा

विधायक निवास व्यवस्था समिति    सचिन कल्याणशेट्टी

शिवसेना और एनसीपी को क्या मिलेगा?इस समिति बंटवारे में महायुती के अन्य सहयोगी दलों, जैसे- शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के विधायकों को जगह नहीं मिली है. इससे इन दलों के नेताओं में असंतोष की संभावना जताई जा रही है. बीजेपी ने मंत्रिमंडल में जगह न पाने वाले विधायकों को इन समितियों के माध्यम से बड़ा पद देकर संतुष्ट करने का प्रयास किया है. लेकिन अब सवाल यह है कि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायकों को कब और कितनी भागीदारी मिलेगी?

नियुक्ति के पिछे के राजनीती क्या है?

बीजेपी ने अपने विधायकों को महत्वपूर्ण समितियों में नियुक्त कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है.

शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के कोटे की समितियों की घोषणा अभी बाकी है, जिससे उनके नेताओं में असंतोष हो सकता है.

महायुती के छोटे सहयोगी दलों के नेताओं की अभी भी प्रतीक्षा जारी है.

यह देखना दिलचस्प होगा कि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायकों को किस हद तक समितियों में प्रतिनिधित्व मिलता है.

इस फैसले से महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ आने की संभावना है, क्योंकि यह बंटवारा सत्ता संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है.

 

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