कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके की मां अनीता दीपके ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पहली प्रतिक्रिया दी है.  उन्होंने कहा- मैं बहुत खुश हूं. मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है. कभी-कभी मुझे डर भी लगता था क्योंकि उसे पीटा गया था. मुझे हमेशा चिंता रहती थी कि उसके साथ क्या होगा. उन्होंने उसे थप्पड़ मारा. मुझे बहुत बुरा लगा. मैं सो नहीं पाई. मैं सुबह तीन-चार बजे तक जागती रही.

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अनीता ने कहा कि मैं कुछ खा भी नहीं पाई. हम दोनों की भूख खत्म हो गई थी और नींद भी नहीं आ रही थी. 7 जून से घर में किसी भी काम में मन नहीं लग रहा है. उसने बहुत बढ़िया काम किया है. वह अभी बहुत छोटा है, फिर भी उसने इतनी कम उम्र में इतना बड़ा काम कर दिखाया है. मुझे उस पर बहुत गर्व है.'

वहीं दीपके के पिता ने कहा, प्रेशर तो आया था, क्योंकि ये पॉलिटिक्स और आंदोलन से मैं बहुत दूर था. बहुत प्रेशर था मेरे ऊपर, और बाकी यूट्यूब पर भी मारने के थ्रेट आ रहे थे. कोई भी कुछ बोलता था, कोई कुछ बोलता था. बहुत घबराहट हो रही थी और डर भी बहुत लगता था. वो डर के मारे हम 15-20 दिन घर छोड़कर बाहर गए थे.

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एसटी हसन ने कहा- पहले लेना था फैसला

इन सबके बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने इसे छात्रों और युवाओं के लंबे आंदोलन की जीत बताते हुए केंद्र सरकार पर जुबानी हमला किया. विभिन्न राज्यों के नेताओं ने एक सुर में कहा कि यह इस्तीफा स्वेच्छा से नहीं, बल्कि देशभर में बढ़ते जनदबाव, छात्रों के आक्रोश और लगातार चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के कारण देना पड़ा. साथ ही, विपक्ष नेताओं ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पारदर्शिता और पेपर लीक मामलों के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग भी दोहराई.

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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने कहा कि यह फैसला पहले भी लिया जा सकता था. उन्होंने कहा कि जब देश का भविष्य सड़कों पर उतरता है तो उसे रोका नहीं जा सकता. उनके अनुसार सरकार को यह एहसास हो गया कि आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है और अब परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.महाराष्ट्र के ठाणे में एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता महेश तापसे ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के लिए 21 बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जो बेहद शर्मनाक है. प्रधानमंत्री मोदी को पहले ही यह निर्णय ले लेना चाहिए था और अब उन्हें युवाओं की ताकत का अहसास हुआ है.