महाराष्ट्र में निकाय चुनाव आने को है और विपक्ष का आरोप है कि सरकार करोड़ों के कर्ज तले दबी हुई है. इस मामले पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी बयान दिया है. उन्होंने नागपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "महाराष्ट्र में महायुति सरकार के सत्ता में आने के बाद विपक्ष लगातार विभिन्न टिप्पणियां करता रहा है. विपक्ष कहता है कि महाराष्ट्र का कर्ज बढ़ गया है."
उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में राज्य का कुल कर्ज ₹9.32 लाख करोड़ है. 2016 में सकल राजस्व ₹22 लाख करोड़ था और नियम के अनुसार कर्ज सकल राजस्व का 25% तक ही होना चाहिए. वित्त वर्ष 2025-26 में यह अनुपात केवल 18.87% है. उन्होंने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि कर्ज नियंत्रण में है और राज्य वित्तीय दृष्टि से स्थिर है.
जनता का धैर्य अब टूट रहा है- संजय राउत
वहीं, विपक्ष ने सरकार पर कर्ज में डूबने का आरोप लगाया है. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि "जनता का धैर्य अब टूट रहा है. दस लाख करोड़ रुपये का कर्ज होने के बावजूद इसे प्रगतिशील राज्य कहा जा रहा है. योजनाओं का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ है, आम लोगों को इसका कोई वास्तविक फायदा नहीं मिलता." उनका यह भी कहना था कि सरकार की वित्तीय नीतियां आम जनता के हित में नहीं दिखाई देतीं और जनता में असंतोष बढ़ रहा है.
कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की टिप्पणियां
महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विधायक नाना पटोले ने कहा कि सरकार लगातार कर्ज उठाती जा रही है, लेकिन यह पैसा कहां जा रहा है, यह स्पष्ट नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि सड़क बनाने वाले ठेकेदारों को भुगतान नहीं किया जा पा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि खर्च पर नियंत्रण नहीं है. इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि "कर्ज नौ लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि सरकार ने कोई नई परियोजना शुरू नहीं की. सवाल यह है कि यह पैसा कहां जा रहा है. यदि ठेकेदारों के फायदे के लिए कर्ज लिया जा रहा है और बांध, पुल तथा सड़कें बनाई जा रही हैं, तो इसे विकास नहीं कहा जा सकता."
