महाराष्ट्र में शिवसेना के दोनों गुटों के संभावित विलय की संभावना/अटकलें पर शिवसेना के विधायक अब्दुल सत्तार ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि दोनों के भविष्य को लेकर कुछ कहा नहीं जा सकता है. हालांकि इस दौरान उन्होंने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का उदाहरण भी दिया. 

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शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के साथ आने की संभावना को लेकर जब सवाल पूछा गया, तो शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने कहा, "मैं तो पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं, कार्यकर्ता नेता को क्या बोलेंगे. इसका निर्णय वो ले सकते हैं, आप समझ सकते हैं 'मातोश्री' का रिमोट किसके हाथ में है? उद्धव बालासाहेब ठाकरे के हाथ में है और हमारी पार्टी का रिमोट किसके हाथ में है? एकनाथ शिंदे के हाथ में है.'' 

कुछ लोग उन्हें एक होने भी नहीं देंगे- अब्दुल सत्तार

उन्होंने आगे कहा, ''दोनों के भविष्य के बारे में आज कुछ नहीं कहा जा सकता. क्या कल किसी ने सोचा था कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे दोनों एक हो सकते हैं? बीच में दोनों में इतना तनाव था लेकिन एक हो गए. ऐसे ही दोनों पार्टी के नेता क्या निर्णय लेंगे क्या नहीं लेगें, ये आज बोलना मुनासिब नहीं है, लेकिन कुछ लोग उन्हें एक होने भी नहीं देंगे."

शिवसेना को जनता का जनादेश प्राप्त है- एकनाथ शिंदे

वहीं, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के दोनों गुटों के संभावित विलय की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ही दिवंगत बाला साहेब ठाकरे की असली विचारधारा का प्रतिनिधित्व करती है. शिंदे ने ये भी कहा कि उनकी शिवसेना को जनता का जनादेश प्राप्त है. वह हिंदुत्व और जमीनी सियासत की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. 

शिवसेना (यूबीटी) MLC अंबादास दानवे और शिवसेना MLA अब्दुल सत्तार के बयानों के बाद दोनों दलों के एक साथ आने की चर्चाओं को हवा मिली . अंबदास दानवे के इस बयान के बाद विलय की चर्चा में तेजी आई कि उन्हें अक्सर लगता है कि शिवसेना के दोनों गुटों को एक साथ आ जाना चाहिए, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सिर्फ उनकी राय मायने नहीं रखती. 

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