राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता सुनील आंबेकर ने एक बयान में कहा है कि साल भारत का विभाजन 1947 ‘जनसंख्या असंतुलन’ का नतीजा था. उन्होंने यह बात मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही. 

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जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम संघ के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित किया गया था जिसमें पत्रकार, लेखक और सोशल मीडिया से जुड़े लोग शामिल हुए थे.

जनसंख्या असंतुलन का परिणाम था भारत का विभाजन- आंबेकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता सुनील आंबेकर ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि जनसंख्या असंतुलन सिर्फ एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में देखा गया है कि जब किसी क्षेत्र में मूल परंपराओं को मानने वाले लोगों की संख्या कम होने लगती है, तो उस जगह की पहचान बदल जाती है. इससे वहां की एकता और अखंडता पर भी असर पड़ सकता है. इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत का विभाजन भी ऐसे ही असंतुलन का परिणाम था.

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जनसंख्या असंतुलन की वजह धर्मांतरण- आंबेकर

आंबेकर ने देश में अवैध घुसपैठ और जबरन या लालच देकर कराए जा रहे धर्मांतरण को भी जनसंख्या असंतुलन की वजह बताया. उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर गंभीरता से सोचने और राष्ट्रहित में जरूरी कदम उठाने की जरूरत है. महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि महिलाएं खुद सक्षम हैं और समय के साथ राजनीति और समाज में उनकी भागीदारी स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी. इसके अलावा, उन्होंने ‘हिंदुत्व’ की अवधारणा पर बात करते हुए कहा कि इसका मतलब सभी लोगों को जोड़कर साथ लेकर चलना है.

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