भोपाल: मध्य प्रदेश के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों और विधायकों के परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर है. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पिछले हफ्ते भोपाल प्रवास के दौरान नेता पुत्रों को टिकट ना देने की बात कही थी. उन्होंने यह बयान ऐसे समय दिया था, जब प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव हो रहे हैं. उनके इस बयान पर काफी चर्चा हुई थी.

राजनीति में परिवारवाद

राजनीति में परिवारवाद की बहस कोई नई नहीं है, इसे खत्म करने की बात भी होती है, लेकिन आजतक यह खत्म नहीं हुआ है. कई नेताओं के परिवार के लिए नेतागिरी ही मुख्य काम है. इसी का उदाहरण हमें त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी देखने को मिल रहा है. चाहे जिला पंचायत हो या जनपद पंचायत हो या ग्राम पंचायत मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कई बड़े सियासी परिवारों की साख इस चुनाव में दांव पर लगी हुई है.

चुनाव मैदान में हैं इन नेताओं के परिजन

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के परिवार की बहू ने भी पंचायत चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल किया है. उनके भतीजे और खरगापुर से बीजेपी विधायक राहुल लोधी की पत्नी उमिता सिंह ने खरगापुर से जिला पंचायत सदस्य के लिए उम्मीदवारी दाखिल की है. निमाड़ क्षेत्र में चलें तो खंडवा में वन मंत्री विजय शाह के बेटे दिव्यादित्य शाह ने खंडवा जिला पंचायत के वार्ड नंबर 14 से नामांकन दाखिल किया है. 

मध्य प्रदेश के नवीन जिले निवाड़ी से बीजेपी विधायक अनिल जैन की पत्नी निरंजना जैन भी जनपद पंचायत का चुनाव लड़ रही हैं. टीकमगढ़ से बीजेपी विधायक राकेश गिरी की दोनों बहनें कामिनी और रानी गिरी जनपद पंचायत सदस्य के चुनाव में उम्मीदवार हैं. वहीं सतना में रैगांव विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी के पूर्व विधायक जुगल किशोर बागरी के बेटे पुष्पराज बागरी ने जिला पंचायत सदस्य के लिए पर्चा दाखिल कर अपनी उम्मीदवारी पेश की है. 

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