MP News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार (29 अप्रैल) को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक आयोजित हुई, जिसमें राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, कर्मचारियों के हित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. 

नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक के बाद मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि कैबिनेट ने ट्रांसफर नीति, महंगाई भत्ता बढ़ोतरी, ग्रीन एनर्जी परियोजना और पराली जलाने पर रोक से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है.

1 मई से 30 मई तक होंगे ट्रांसफरकैबिनेट ने इस वर्ष के स्थानांतरण (ट्रांसफर) सत्र के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं. ट्रांसफर की समय सीमा 1 मई से 30 मई तक निर्धारित की गई है. इसके बाद कोई भी ट्रांसफर नहीं किया जाएगा. सभी विभागों को यह निर्देश दिया गया है कि वे स्थानांतरण की कार्रवाई ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से ही करें.

ट्रांसफर की संख्या को पदों की कुल संख्या के अनुसार सीमित किया गया है. इसमें 200 पद तक अधिकतम 20 फीसदी ट्रांसफर, 201 से 1000 पद तक अधिकतम 15 फीसदी, 1001 से 2000 पद तक अधिकतम 10 फीसदी, 2001 से अधिक पद संख्या पर अधिकतम 5 फीसदी. इसके अतिरिक्त, अगर कोई विभाग अपनी अलग ट्रांसफर नीति बनाना चाहता है, तो वह सामान्य प्रशासन विभाग से स्वीकृति प्राप्त कर ऐसा कर सकता है.

महंगाई भत्ता अब 55 प्रतिशतमुख्यमंत्री द्वारा पहले की गई घोषणा के अनुसार अब शासकीय कर्मचारियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता मिलेगा. कैबिनेट ने इसे आधिकारिक मंजूरी दे दी है. 1 जुलाई से 3 फीसदी की बढ़ोतरी,1 जनवरी से 2 फीसदी की बढ़ोतरी. इस प्रकार कुल 5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ राज्य के सरकारी कर्मचारियों को अब 55 फीसदी महंगाई भत्ता मिलेगा, जो कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर होगा.

ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ता कदमवहीं राज्य सरकार ने ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया है. मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश सरकार मिलकर 2000 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित करेंगे. यह परियोजना राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है.

पराली जलाने पर सख्त कैबिनेट बैठक में किसानों से पराली न जलाने की अपील भी की गई. सरकार ने साफ कर दिया है कि जो किसान पराली जलाते पाए जाएंगे उनकी किसान सम्मान निधि एक साल के लिए रोकी जाएगी. उनके उत्पादन को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा नहीं जाएगा. 

सरकार ने कहा है कि पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण न केवल पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि यह किसानों के बच्चों की सेहत पर भी प्रभाव डाल सकता है. ऐसे में किसानों से अपील की गई है कि वे पराली न जलाएं और वैकल्पिक उपायों का सहारा लें.