MP Elections 2023: चुनावी साल में मध्यप्रदेश की सियासत में वर्तमान में आदिवासी समुदाय मुख्य केन्द्र बिन्दु बनकर रह गया है. सीधी जिले में हुई आदिवासी युवक के साथ घटना के बाद से ही विपक्ष लगातार हमलावर है. आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेसी विधायकों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर आदिवासी समुदाय पर हो रहे अत्याचारों में निवारण की बात कही है. इस मौके पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह, कांतिलाल भूरिया, पूर्व मंत्री उमंग सिंघार, बाला बच्चन, डॉ. अशोक मर्सकोले, डॉ. हीरा अलावा, हर्ष विजय गहलोत सहित अनेक आदिवासी नेता मौजूद रहे. 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा राज्यपाल को दिए गए ज्ञापन में बताया कि मध्यप्रदेश देश का ऐसा राज्य है, जहां सबसे बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के नागरिक निवास करते हैं. मध्यप्रदेश के समाज, संस्कृति, संस्कार और परमपराओं में आदिवासी समुदाय का उल्लेखनीय योगदान है. आदिवासी समुदाय मप्र के सामाजिक जीवन में अभिन्न और अति महत्वपूर्ण है.

18 साल में 30 हजार मामले

पूर्व मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ज्ञापन सौंपकर कहा कि भारतीय जनता पार्टी की 18 साल की सरकार में आदिवासी समुदाय के ऊपर अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है.

बीजेपी सरकार में आदिवासी उत्पीड़न के 30 हजार से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि कई ऐसे मामले हैं जो प्रकाश में नहीं आए. पीसीसी चीफ कमलनाथ ने कहा कि हाल ही प्रदेश के सीधी जिले में एक आदिवासी युवक के ऊपर पेशाब करने की घटना सामने आई. घटना का मुख्य आरोपी बीजेपी नेता था और बीजेपी विधायक का विधायक प्रतिनिधि था. उक्त से से पूरे देश में मप्र शर्मशार हुआ है.

इससे पहले भी घटित हुई घटनाएंपीसीसी चीफ कमलनाथ ने कहा कि इसके पूर्व नीमच में आदिवासी युवक को गाड़ी से बांधकर घसीटकर हत्या करने का मामला पूरी दुनिया ने देखा. नेमावर में आदिवासी युवती और उसके परिवार के 5 लोगों को जिंदा गाड़ देने का भीषण कृत्य भी मध्यप्रदेश की माटी को देखना पड़ा. सीधी जिले में घटित हुई घटना के कुछ घंटों में ही इंदौर में महू से दो आदिवासी युवकों को बुरी तरह पीटे जाने का वीडियो भी सामने आया. 

दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे मामलेपूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार का आदिवासी विरोधी रवैया इस बात से भी समझा जा सकता है कि आदिवासी कल्याण का बजट राजनीतिक स्वरूप की सरकारी रैलियों पर खर्च कर दिया जाता है. अनुसूचित जनजाति के लोग अपने लिए बनाए गए अजाक थाने में शिकायत कराते हैं, लेकिन उन थानों का बजट भी शासन ने स्वीकृत नहीं किया है. इस तरह से मध्य प्रदेश की सरकार और राजनीतिक तंत्र एक ऐसा घृणा और अन्याय का वातावरण पैदा कर रहा है, जिसमें आदिवासी समुदाय के प्रति अत्याचार दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं. 

आदिवासियों की रक्षा के लिए आगे आएं राज्यपालराज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने मीडिया से चर्चा में कहा कि आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार को लेकर राज्यपाल को ज्ञापन दिया है. सीधी घटना ने देश भर में मध्यप्रदेश को शर्मसार कर दिया है. हमने राज्यपाल से मांग की है कि आदिवासी के हितों की रक्षा के लिए आगे आएं.

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