लखनऊ में कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड और 15 छात्रों की मौत के बाद इंदौर प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है. छात्रों की सुरक्षा को लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर शहरभर में कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू की गई. इसके लिए नगर निगम, फायर ब्रिगेड, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीमें बनाई गईं, जिन्होंने विभिन्न इलाकों में स्थित कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया.

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जांच के दौरान कई कोचिंग संस्थानों में फायर सेफ्टी के नियमों का पालन नहीं पाया गया. अधिकारियों को कई जगह फायर एनओसी नहीं मिली, जबकि कुछ संस्थानों में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट), अग्निशमन यंत्र और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं थीं. अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तुरंत कार्रवाई की.

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कई कोचिंग सेंटरों पर लगा ताला

निरीक्षण के दौरान जिन कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी मिली, उन्हें मौके पर ही सील कर दिया गया. कार्रवाई के समय कोचिंग में मौजूद छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उन्हें घर भेज दिया गया.

अचानक हुई इस कार्रवाई से छात्रों और अभिभावकों के बीच हलचल भी देखने को मिली. हालांकि प्रशासन ने साफ किया कि यह कदम केवल विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.

प्रशासन का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. जिन संस्थानों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. अधिकारियों ने बताया कि शहर के सभी कोचिंग सेंटरों की चरणबद्ध तरीके से जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटना को रोका जा सके.

सुधार के लिए मिलेगा 15 से 20 दिन का समय

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सील किए गए संस्थानों को शपथ पत्र देने के बाद 15 से 20 दिन का समय दिया जाएगा. इस दौरान उन्हें फायर सेफ्टी और सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी इंतजाम पूरे करने होंगे.

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तय मानकों के अनुसार व्यवस्थाएं पूरी होने और जांच में संतोषजनक स्थिति मिलने के बाद ही उन्हें दोबारा संचालन की अनुमति दी जाएगी. प्रशासन का मानना है कि इस अभियान से कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जा सकेगा.