2020 में कांग्रेस ने 15 साल बाद पाई मध्य प्रदेश की सत्ता कुछ ही महीनों में खो दी थी. हालांकि, इसके पीछे की वजह पर कांग्रेस नेताओं ने चुप्पी साध ली थी, लेकिन अब लगभग 5 साल बाद एक-एक करके इस पर नेता अपनी बात रख रहे हैं.
हाल ही में दिग्विजय सिंह ने इस पर अपनी राय बताई, जिसमें उन्होंने इस सरकार के गिरने के पीछे की वजह तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मतभेद बताई थी, जिसके बाद अब कांग्रेस नेता कमलनाथ ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
बातें उखाड़ने से कोई फायदा नहीं- कमलनाथ
उन्होंने अपने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, 'मध्य प्रदेश में 2020 में मेरे नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिरने को लेकर हाल ही में कुछ बयानबाजी की गई है. मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई फायदा नहीं.
उन्होंने आगे लिखा, "यह सच है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं. इसी नाराजगी में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और हमारी सरकार गिरायी."
दिग्विजय सिंह का दावा
बता दें कि दिग्विजय सिंह ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि कांग्रेस सरकार के गिरने की आशंका पहले से जताई थी. कांग्रेस की सरकार गिरेगी ये पहले से पता था, इस सवाल पर दिग्विजय सिंह ने कहा, "ये गलत है, ये प्रचारित किया गया, लेकिन इसके खिलाफ मैंने ये चेताया था कि ये घटना हो सकती है, एक उद्योगपति के घर पर हुई बैठक में मैंने दोनों नेताओं के मतभेद दूर करने की कोशिश की."
उन्होंने आगे कहा, "यहां तक कि एक विशलिस्ट भी तैयार की गई, लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ. इससे तनाव बढ़ा और सरकार गिर गई.” हालांकि, दिग्विजय ने उद्योगपति का नाम उजागर नहीं किया.
क्यों नहीं सुलझा विवाद?
दिग्विजय सिंह से पूछा गया कि मतभेद किन मुद्दों पर थे. उन्होंने कहा, “छोटे-मोटे मुद्दों को लेकर असहमति थी. तय हुआ था कि ग्वालियर-चंबल संवाद में जैसा हम कहेंगे, वैसा होगा. हमने लिखित में सुझाव दिए, दोनों नेताओं ने हस्ताक्षर भी किए, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ. इसके बाद ही राजनीतिक संकट गहराया.”
