Madhya Pradesh News: जिन हाथों की वजह से कभी किसी के घर में अंधेरा हुआ होगा, आज वही हाथ घरों को रोशन करने में जुटे हुए हैं. आजकल मध्य प्रदेश में जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल (Netaji Subhash Chandra Bose Central Jail) में बंदी एलईडी बल्ब (LED bulb) बना रहे हैं, जो बाजार में मिलने वाले एलईडी बल्ब से सस्ते हैं. नामी कंपनियों के महंगे एलईडी बल्ब को टक्कर देने के लिए जल्द ही बाजार में जेल के अंदर बंदियों द्वारा बनाए गए एलईडी बल्ब आने वाले है जिसकी अनुमानित कीमत 85 रुपये होगी. बंदियों ने जेल में लघु उद्योग लगाकर नौ वाट के एलईडी बल्ब तैयार किए हैं. जिनका परीक्षण भी सफल हो गया है.
बेचा जाएगा बाजार में-अधीक्षकसेंट्रल जेल के अधीक्षक अखिलेश तोमर का कहना है कि, फिलहाल इन बल्बों का इस्तेमाल संभाग के सभी जेलों में किया जा रहा है और जल्द ही इन्हें बाजार में भी बेचा जाएगा. बता दें कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल में जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर के निर्देश पर 38 बंदियों ने आईटीआई के प्रशिक्षित विशेषज्ञों से एलईडी बल्ब बनाने की तकनीक सीखी. कई दिनों के प्रशिक्षण और कड़ी मेहनत से बंदियों ने एलईडी बल्ब के निर्माण की कला में महारत हासिल कर ली.
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इसके बाद जेल प्रशासन द्वारा भोपाल से एक कंपनी के माध्यम से एलईडी बल्ब बनाने में प्रयोग की जाने वाली सामग्री मंगवाई गई. विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बल्ब बनाने में प्रयोग आने वाली मशीन भी मंगाई गई. जरुरत की सभी सामग्री एकत्रित होने के बाद बंदियों ने जेल के कारखाने में ही मशीन लगाई और एलईडी बल्ब का निर्माण शुरू कर दिया.
उतारा जाएगा कान्हा ब्रांड के नाम से यहां बता दे कि इस पूरे प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत मात्र साढे 11 हजार रुपये है, जिसमें डाई मशीन, कटर, शोल्डिंग, कवर, प्लेट और अन्य सामान क्रम किया गया है. जेल में बंदियों द्वारा बीस से तीन मिनट में एक एलइडी बल्ब बनाकर तैयार कर लिया जाता है. इसके बाद दस प्रतिशत प्रॉफिट जोड़कर एलईडी बल्ब को बाजार में करीब 85 रुपये में बेचने की तैयारी है. बंदियों द्वारा बनाए गए एलईडी बल्ब को कान्हा ब्रांड के नाम से बाजार में उतारा जाएगा, जिसमें नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल जबलपुर भी लिखा होगा.
