एक तरफ इंदौर दूषित पानी के चलते हुई मौतों के गहरे जख्मों से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र स्थित रेडवाल कॉलोनी में भ्रष्टाचार और जल संकट का एक गंभीर मामला सामने आया है. शनिवार को कॉलोनी की सैकड़ों महिलाओं ने हाथों में खाली बाल्टियां लेकर स्थानीय पार्षद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और जमकर नारेबाजी की.
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने क्षेत्रीय पार्षद कमल वाघेला पर सीधे और गंभीर आरोप लगाए हैं. महिलाओं का कहना है कि कॉलोनी में लंबे समय से पीने के पानी का संकट है, लेकिन पार्षद समस्या हल करने के बजाय बोरिंग करवाने के नाम पर रुपयों की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि जब भी वे शिकायत लेकर जाते हैं, तो उन्हें केवल आश्वासन देकर टाल दिया जाता है.
आक्रोशित महिलाओं ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी पानी की टंकी को पार्षद ने अपनी 'निजी हवेली' की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, जबकि पूरी कॉलोनी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है. नलों में कई-कई दिनों तक पानी नहीं आ रहा है, जिससे लोगों का दैनिक जीवन नारकीय हो गया है.
ड्रेनेज के नाम पर पहले भी हुई वसूली?
स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, यह शोषण नया नहीं है. इससे पहले ड्रेनेज लाइन बिछाने के नाम पर प्रत्येक घर से 20 से 25 हजार रुपये खर्च कराए गए थे. इसके बावजूद ड्रेनेज की समस्या जस की तस बनी हुई है. अब ड्रेनेज सुधार के नाम पर दोबारा पैसों की मांग की जा रही है, जिसने आग में घी डालने का काम किया है.
प्रशासन से जांच और समाधान की मांग
रेडवाल कॉलोनी की महिलाओं ने जिला प्रशासन और नगर निगम से मांग की है कि बुनियादी समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाए और पार्षद के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो. इंदौर में पानी की गुणवत्ता और आपूर्ति को लेकर मचे बवाल के बीच, यह विरोध प्रदर्शन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है.