मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के जावर थाना क्षेत्र से रविवार देर शाम मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले एक मौलाना के कमरे से करीब ₹19 लाख के नकली नोट बरामद किए गए. इसके बाद पुलिस ने आरोपी मौलाना जुबेर अंसारी के खिलाफ मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी. प्रारंभिक जांच में पता चला है कि आरोपी मौलाना जुबेर पड़ोसी जिले बुरहानपुर के हरिपुरा का स्थायी निवासी है और लूट व चोरी जैसे 6 अपराधों का हिस्ट्रीशीटर निगरानी बदमाश है.

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इसी बीच, उसे 29 अक्टूबर को महाराष्ट्र की मालेगांव पुलिस ने ₹10 लाख के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था. रविवार को इसकी जानकारी लगने पर गांव वालों की मदद से खंडवा पुलिस ने आरोपी के कमरे से ₹19 लाख 78 हजार के ₹500 के नोटों के बंडल, पेपर काटने का कटर, दो कैंची, दो मोबाइल और पेपर सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाला हेयर ड्रायर जब्त किया.

पुलिस जांच और एसआईटी का गठन

हालांकि पुलिस को फिलहाल नोट छापने के किसी उपकरण नहीं मिले हैं और आरोपी अभी महाराष्ट्र पुलिस की हिरासत में है. इसी कारण खंडवा पुलिस ने एक एसआईटी गठित की है, जिसमें खंडवा एएसपी महेंद्र तारणेकर सहित दो थानों के थाना प्रभारी और साइबर एक्सपर्ट शामिल हैं. यह टीम आरोपी से पूछताछ कर आगे की जानकारी निकालते हुए सबूत जुटाएगी.

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पुलिस के अनुसार, मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने आरोपी के वहां ठहरने की जानकारी नहीं दी थी, जिसको लेकर कमेटी पर भी कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया जाएगा.

मुस्लिम समाज की प्रतिक्रिया और शहर काजी का बयान

मामले के सामने आने के बाद मुस्लिम समाज की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. खंडवा शहर काजी सैय्यद निसार अली ने आरोपी मौलाना जुबेर अंसारी के कृत्य की निंदा करते हुए उसे कड़ी सजा देने की मांग की. उन्होंने पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई के लिए धन्यवाद दिया और शहर की अन्य मस्जिदों की कमेटियों से अपील की कि बाहर से आने वाले इमामों की पुलिस तस्दीक कराने के बाद ही उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाए.

एसपी मनोज राय ने दी जानकारी, टीम मालेगांव भेजी गई

खंडवा एसपी मनोज राय ने बताया कि इंतजामिया कमेटी ने इमाम के वहां रहने की कोई जानकारी पुलिस को नहीं दी थी. मामला सामने आने के बाद खंडवा डीएसपी हेडक्वार्टर के नेतृत्व में एक टीम मालेगांव भेजी गई है. वहां आरोपी जुबेर अपने एक साथी के साथ अभी पुलिस कस्टडी में है. आरोपी से वहीं पूछताछ के दौरान खंडवा पुलिस यह जांच करेगी कि नकली नोटों की छपाई कैसे की जा रही थी, कहां से इसकी सप्लाई होती थी और कहां इन्हें खपाया जा रहा था.