मध्य प्रदेश के रीवा में जैन आर्यिका माताजी के साथ हुई दुखद घटना के विरोध में आज डूंगरपुर का जैन समाज आक्रोशित होकर सड़कों पर उतर आया. जैन समाज भिलूडा के अध्यक्ष अरविंद कुमार शाह के नेतृत्व में समाजजनों ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा. इसमें घटना के दोषियों पर कठोर कार्रवाई और देशभर में साधु-संतों के लिए विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की पुरजोर मांग की गई है.
ज्ञापन की 4 प्रमुख मांगें
रीवा मामले की SIT जांच: समाज ने 20 मई 2026 को आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका श्री उपशममति माताजी के साथ हुई घटना को संदेहास्पद बताते हुए इसकी एसआईटी (SIT) या न्यायिक जांच की मांग की है.
- राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति: पैदल विहार करने वाले अहिंसक और निहत्थे साधु-संतों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार से जल्द से जल्द 'राष्ट्रीय सुरक्षा गाइडलाइन' और SOP तैयार करने की अपील की गई है.
- विहार मार्गों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल: जैन संतों के विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, ट्रैफिक नियंत्रण और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस का विशेष सहयोग सुनिश्चित किया जाए.
- डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण: रीवा घटना से जुड़े CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखकर साजिश (Conspiracy) के एंगल से भी गहन जांच की जाए.
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'संतों के खिलाफ अपराधों को विशेष श्रेणी में रखें'
जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा, "साधु-संत पूर्णतः अहिंसक और निहत्थे होते हैं. उनके विरुद्ध होने वाले अपराधों को 'विशेष संवेदनशील श्रेणी' में रखा जाना चाहिए. स्थानीय स्तर पर 'संत सुरक्षा समन्वय सेल' (Sant Security Coordination Cell) और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था बनाना आज समय की सबसे बड़ी मांग है."
देशभर में उग्र आंदोलन की चेतावनी
इस प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान अरविंद कुमार शाह के साथ नरेंद्र गलालिया, राजेंद्र जैन, राजेंद्र वेड़ा, चंद्रकुमार जैन, नटवरलाल जैन और महिला शक्ति (प्रेरणा शाह, तिलक नंदिनी शाह, विनता शाह, अनीता जैन, साधना गलालिया) सहित भारी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे.
जैन समाज ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि संतों की सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए और रीवा घटना की पारदर्शी जांच नहीं हुई, तो समाज देशभर में उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होगा.
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