धार की ऐतिहासिक और बहुचर्चित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद मामले में आज बड़ा फैसला आ सकता है. इंदौर हाईकोर्ट डबल बेंच में इस मामले में अपना निर्णय सुना सकती है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजर टिकी हुई है.

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हाईकोर्ट की कॉजलिस्ट में मामले को 'फॉर डिलीवरी ऑफ जजमेंट' यानी फैसला सुनाए जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. प्रशासनिक जज विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने 12 मई को अंतिम सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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जैन समाज ने इसे जैन तीर्थस्थल बताया

मामले में हिंदू पक्ष भोजशाला को माता वाग्देवी का मंदिर बता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद होने का दावा कर रहा है. वहीं जैन समाज ने भी इसे जैन तीर्थ स्थल बताया है. हाईकोर्ट ASI सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेज और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर फैसला सुनाएगा.

फैसले से पहले धार जिले में प्रशासन अलर्ट मोड पर है. सुरक्षा व्यवस्था के तहत जिले में करीब 1000 पुलिस जवान तैनात किए गए हैं. जिले में धारा 163 लागू कर संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है. सोशल मीडिया पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है.

जनता से शांति की अपील

धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा ने जिले वासियों से शांति और सौहार्द बनाए रखने तथा अदालत के फैसले का सम्मान करने की अपील की है. जानकारी के लिए बता दें कि भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है. वहीं, जैन समुदाय के एक याचिकाकर्ता ने विवादित परिसर में मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल होने का दावा किया है और कहा है कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू समुदाय भोजशाला में स्थापित वाग्देवी की प्रतिमा बता रहा है, वह असल में जैन यक्षिणी अम्बिका की मूर्ति है.

 

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